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अस्पतालोमें नवजात शिशुओंकी बदल जानेकी शक्यता कितनी है? – 2

श्रीमति नवनीत राणा को गिरफ्तार किया.

ध्वनिप्रदुषण और उद्धवः

आम बातचित ध्वनिका स्तर शून्य डेसीबल होता है. ऊंची आवाज़से बोलो तो ५ डेसीबल  हो जाता है. चार दिवालके अंदर १० डेसीबलके उपरकी आवाज़ स्वास्थ्यके लिये हानि कारक है. खुलेमें ७५ डेसीबल से कम होना चाहिये. ये १० – ७५ के लिये सरकारकी समयबद्ध और १५ दिनसे अधिक न हो ऐसी अनुमति लेनी पडती है. रात्रीके १० बजेसे सुबह ०६ बजेके अंतरालमें कोई लाउडस्पीकर ध्वनि की अनुमति है ही नहीं.

उत्तर प्रेदेशकी सरकारने ध्वनि प्रदुषण नियंत्रित करने पर कार्यवाही की. मंदिरसे भी लाउडस्पीकर हटवाये और मस्जिदसे भी लाउड स्पीकर हटवाये.

लेकिन (हिंदुओके हृदय सम्राट बाला ठाकरे)की संतान(उद्धव)की सरकारने न तो मस्जिद परसे लाउडस्पीकर हटवानेको सोचा न तो उन लाऊड स्पीकरोंकी आवाज़को नियंत्रित करने को सोचा. उद्धव ठकरे वैसे तो कहेंगे की मैंने तो सोचा था. मैंने उसके लिये कदम नहीं उठाये इसका मतलब यह नहीं कि मैं सोचता नहीं हूँ! मेरे साथी कौन है मालुम है? मेरे साथी शरद और रा.गा. है. समज़े न समज़े?

श्रीमति नवनीत राणाने क्या किया था?

सरकारकी इस निष्क्रियता के प्रति सरकारका ध्यानाकर्षित करनेके लिये श्रीमति नवनीत राणाने “मातोश्री” के सामने हनुमान चालिसाका पाठ करनेका एलान किया. हिंदुओंके हृदय सम्राट बाला ठाकरेके संतानकी सरकारको पता भी तो चलना चाहिये न!! “मातोश्री” निवासस्थान हिंदु-हृदयका प्रतिक था, है और रहेगा भी (!!).

हम ऐसा माननेवालोंमेंसे है. और आप हमको मना नहीं कर सकते, चाहे वह हम (नवनीत राणा) ही क्यों न हो?

मातोश्री के सामने हम हनुमान चालिसाका पाठ करके, आपकी सरकारकी एक और निष्क्रीयताके प्रति ध्यान्याकर्षण करते है. वह है ध्वनि प्रदुषणको रोकनेकी निष्क्रीयता है. आपकी यह निष्क्रीयता  पूर्वग्रहयुक्त कार्यशैलीके कारण है. हम इसके उपर आपका ध्यानाकर्षण करना चाहते है.

श्रीमति नवनीत राणाने लिखित रुपसे इस अघाडी सरकारको सूचित भी किया. सरकारको पूर्वरुपसे सूचित करना “महात्मागांधीवादी विरोध/आंदोलनकारी करनेकी प्रणालीका” एक अभीन्न अंग है.

इससे यह भी सूचित होता है कि, सरकारसे विरोध करनेवाला/वाली संवाद करनेके लिये तयार है. क्यों कि सूचित करनेमें संवाद निहित है.    

हनुमान रामायणका एक पात्र है. रामायण एक ऐतिहासिक ग्रंथ है. हनुमान एक ऐतिहासिक पात्र है. राम भी एक ऐतिहासिक पात्र है. भारतके लोग रामको सूर्य (विष्णुका) अवतार मानते है. सूर्य है जो पृथ्विका आधार है और पालक है. भारतके लोग सूर्य/विष्णुको भगवान मानते है. यह परंपरा जापानसे लेकर ईजिप्त तक प्रचलित थी. भारत और जापानमें आज भी प्रचलित है. हनुमान, रामके दूत और सहायक है. हनुमानको रुद्रका अवतार भी माना जाता है. इससे राम और हनुमानकी ऐतिहासिकता नष्ट नहीं हो जाती. इसको धर्मसे जोडो या न जोडो, ऐतिहासिक पात्रोंका गुणगान करना गुनाह नहीं हो सकता.

श्रीमति नवनीत राणा, संवादके लिये तयार थी. उद्धवजीने सोचा होगा कि यदि संवाद करेंगे तो “आजा फसा जा” जैसा हो सकता है. जब हमारे तो दोनों हाथमें लड्डु है तो डर काहेका!! दोनों लड्डु दाउदके दिये हुए है. यदि दाउदजी भारतमें अनुपस्थित होते हुए भी और बिना पदभार भी चाहे वह कर सकते है तो हम तो यहां विद्यमान है … हमारे पास सत्ता भी है … और लड्डु भी है.

तो उद्धवजीने श्रीमति नवनीत राणा पर देशद्रोहका आरोप लगाके, उनको अनुपनिहित (नोनबेलेबल) बंधक (एरेस्ट) बनाके कारावास में ठोक दिया. यदि हम विरांगना कंगना रणौतको दिनमें तारे दिखा सकते है, मीडीया दिग्गज अर्णव गोस्वामीको कारावासकी हवा खिला सकते है और पीटवा भी सकते है तो यह नवनीत राणा क्या चीज़ है!! हम तो उसको, भूमिके नीचे २०फीट गाड सकते है.

जिसका कोई नहीं होता उसका ईश्वर होता है.

ईश्वरने भारतके लिये कई बार यह सिध्द किया है.

भारतमें ईश्वरका पात्र कौन लेगा? न्यायालय!!

न्यायालयका काम क्या है?

न्याय करना!!

“न्याय करना” मतलब?

अन्याय दूर करना!!

श्रीमति नवनीत राणा पर अन्याय हुआ है?

हाँ जी.

कैसे अन्याय हुआ है?

(क्रमशः)

शिरीष मोहनलाल महाशंकर दवे

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नरेन्द्र मोदीको क्या बनना चाहिये? कौटिल्य अथवा पृथ्वीराज चौहाण? – २

मुहम्मद घोरीने किसीको भी क्षमा किया नहीं था. ठीक उसी प्रकार नहेरुवीयन कोंग्रेसने भी कभी अपने देशी शत्रुको क्षमा किया नहीं था. उतना ही नहीं फर्जी मामले बनाकर भी उसकी मानहानि करनेकी और न्यायिक कार्यवाही द्वारा उसको हानि करनेके भरपुर प्रयत्न किये है.

नहेरुः
नहेरुने अपने विरोधी मोरारजीके विरुद्ध मोरारजीकी संतानको लेकर फर्जी कथाएं चलाइ थीं. कामराजप्लान के अंतर्गत एक फर्जी प्लान बनाके मोरारजी देसाईको मंत्री मंडलसे निकाला गया था.

Narendra Modi has to decide ०१

ईन्दीरा घाण्डीः

ईन्दिरा घान्डी नहेरुवाली नीति चलाके मोरारजीकी मानहानि करवाती रहती थीं.

इन्दिराने आपातकाल के दौरान कई नेताओंको मरणासन्न कर दिया था.

आपतकाल खुद एक फॉड था.

वीपी सींग के विरुद्ध सेंटकीट्स मे उनके नाम फर्जी एकाउन्टका केस दर्ज किया था.

सर्वोदय संस्थाओंके खिलाफ जांचके आदेश दिये थे और सर्वोदय संस्थाओंको निर्दोष होते हुए भी परेशान किया था.

मोरारजी देसाई सीआईएके वेतन पत्रक (पे रोल) पर है ऐसे आक्षेप करवाये थे.

जयप्रकाश नारायणने सैन्य को विद्रोह करनेका कहा था ऐसे आक्षेप करके उनको कारावसमें बंद किया था. अन्य हजारों नेताओंको भी कारावास में बंद किया था.

तारकेश्वरी सिंहाके उपर असत्य आक्षेप करवाये और उनको आत्म हत्या करनी पडी(!).

ज्योर्ज फर्नान्डीस पर फर्जी केस बनाया था और उनको जेलमें बंद किया था.

सोनीया-एमएमएसः

बाबा राम देव को फर्जी केस बनाके परेशान किया, अन्ना हजारे को भी परेशान किया, किरन बेदीके विरुद्ध आक्षेप करके परेशान किया, बाजपाईका किस्सा और अडवाणीकी घटनाएं तो हमने देख ही ली है.

नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, आदि के विरुद्ध फर्जी केस बनवाये.

पुलिसका मोरल डाउन करनेके कई और काम भी किये.

नहेरुवीयन और उनके साथीयोंका संस्कार रहा है कि खुदकी सत्ता और धनके लिये कुछ भी करो, चाहे देशका सामाजिक चारित्र्य कितना ही अधम क्युं न हो जाय.

जो लोग वोटबेंकी सियासत खेलते है वे हमेशा पुलिस और सीबीआई का यथेच्छ उपयोग करते हैं. सरकारी अधिकारीयोंको भ्रष्ट होने देते हैं फिर उनके भ्रष्टाचारके आधार पर उनसे गलत काम करवाते हैं. अन्य लोगोंकी भी ब्लेक डायरी बनाई जाती है जिनमें लालु, मुलायम, ममता, मायावती, जयललिता, करुणानिधि शरद पवार मुख्य है.

ये सब अर्वाचीन मुहम्मद घोरी है.

इन अर्वाचीन मुहम्मद घोरीयोंको कैसे नष्ट कर सकते है?

अति सरल है. क्युं कि ये लोग अतिभ्रष्ट है, जहां भी हाथ डालो उनका भ्रष्टाचार पकडा जा सकता है.

(१) आपातकालमें जिन्होने ईन्दिरा गांधीकी सहायता की थी और जो लोग अभी भी जीवित है, उनके उपर शाह जांच समितिके सूचनोंके आधार पर कार्यवाही हो सकती है. उनको गिरफ्तार कर लो और जेलमें डाल दो. कार्यवाही होती रहेगी.

(२) एन्डरसनको भगाने वालोंमें सोनिया गांधी एक पक्षकार बन सकती है. उनके उपर भी ऐसी ही कार्यवाही हो सकती है.

(३) कश्मिरी हिन्दुओंके प्राकृतिक अधिकारके हनन और लगातार हो रहे मानवीय अधिकार के हननके मामलेमें, अपना फर्ज न निभानेके कारण, कश्मिरके सभी नेताओंको तथा नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेताओंको शिघ्र ही प्रग्रहित (गिरफ्तार) कर सकते हैं. उनकी संपत्ति जप्त कर सकते है.

(४) नहेरुवीयन कोंग्रेसीयोंने और उनके साथीयोंने विदेशी बेंकोमें बीना रीझर्वबेंककी संमति गैरकानुनी एकाउन्ट खोलके काला-लाल धन जमा किया, इस बात पर उन सबके उपर फौजदारी कार्यवाही कर सकते है. क्यों कि यह देशके साथ गद्दारीका विषय है ये सब एकाउन्ट होल्डर गिरफ्तार हो सकते है. इन एकाउन्टोंका राष्ट्रीयकरण करके सबके नाम प्राप्त किया जा सकता है और जो लोग एकाउन्ट होल्डर न हो किन्तु मनिनीत (नोमीनी) व्यक्ति हो तो भी उसके उपर फौजदारी कार्यवाही हो सकती है.

(५) कोमनवेल्थ गेम, कोयला आबंटन और २-जी के बारेमें कई नेताओंको गिरफ्तार करके जेलमें रखा जा सकता है.

(६) भारतीय करन्सी नोट के मुद्रणका संविदा (ठेका) जिसको दिया था वह आतंकी संगठनोंसे संलग्न होनेके कारण अन्य देशोंमे प्रतिबंधित थी. फिर भी नहेरुवीयन कोंग्रेसने उसको मुद्रणका संविद दिया. कई कर्जी करन्सी नोट सरकारी बेंकके एटीएम यंत्रमेंसे निकली थी. इससे यह निरपेक्ष प्रतिबिंबित होता है कि नहेरुवीयन कोंग्रेसके ही नेतागण इससे संलग्न है. इस मामले पर भी कई नेताओंको गिरफ्तार किया जा सकता है.

(७) कई नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेतागण जातीय मामलेमें विवादित है. उनके उपर कार्यवाही शुरु की जा सकती है.

दुसरे किस प्रकारके मुहम्मद घोरी है?

कई नहेरुवीयन कोंग्रेसके मुसलमान नेताओंकी संतान अभद्र और विभाजनवादी कोमवादी भाषा प्रयोग करती रहेतीं हैं इतना ही नहीं कई नहेरुवीयन कोंग्रेस और उसके साथी नेताओंने कोमवादी उच्चारण अनेकानेक बार किया है उनको गिरफ्तार करके जेलमें बंद कर सकते है.

तीसरे किस प्रकारके मुहम्मद घोरी है?

ये है समाचार माध्यमके स्वामि. जिनका काम समाजिक शिक्षाका काम करना है. उसके स्थान पर वे देशको विभाजित करनेका काम करते हैं. इनके पाससे हमेशा उचित अवसरों पर स्पष्टिकरण मांगते रहेना चाहिये और जब वे विफल रहें तो उनका अनुमति पत्र रद करनेका और कानुनी कार्यवाहीका आरंभ कर देना चाहिये.

चौथे किस प्रकारके मुहम्मद घोरी है?

ख्रिस्ती धर्मके पादरी लोग हैं. ये लोग हिन्दु धर्मकी निंदा करते हैं. तत्कालिन बने इसाईयोंको हिन्दुओंसे संबंध न रखने के लिये प्रभावित करते हैं और विभाजनवादी प्रवृतियां करते हैं. गरीब हिन्दुओंको लालच दे के धर्म परिवर्तन करवाते हैं. ऐसे पादरीयों पर सुक्ष्म दृष्टि रखकर कानुनी कार्यवाही की जा सकती है.

पांचवे किस प्रकारके मुहम्मद घोरी है?

ये है सरकारी अफसर. इनका काम नियमका पालन करना है और नियमका पालन करवाना है. इस कामके लिये उनको वेतन मिलता है. वे अपनी क्षतियांके लिये और सामाजिक अव्यवस्थाके लिये उत्तरदेय है.

नरेन्द्र मोदीको चाहिये कि इनको सीधा करें. यदि इनको सीधा करेंगे तो सब कुछ सीधा हो जायेगा.

कार्यवाही कैसे की जाय?

जो भी कार्यवाही करनी है, वह किसी भी प्रकारका कोलाहल किये बिना करना है. इसमें कोई निवेदनों की या विज्ञापन देनेकी आवश्यकता नहीं हैं. यदि कोई समाचार माध्यमवाले अनावश्यक प्रश्न करें तो उनके उपर भी जनताको पथभ्रष्ट करनेकी और जनताको भ्रमित करनेके आरोप लगाके कानुनी कार्यवाही हो सकती है.

अन्य कई कार्य है जो विकास, कानुन सुधार और गवर्नन्सके बारेमें हैं वे होते रहेंगे, क्यों कि प्रत्येक विकासकी परिकल्पनाके निदेशकका उत्तरदायित्व है कि वह अपना पूर्ण करें. और वह करेगा ही. उपरोक्त कार्य जिसमें कानुनमें संशोधनकी आवश्यक नहीं है, वे प्रारंभ कर सकते हैं. वास्तवमें नियम तो प्रत्येक उत्तरदायुत्वके लिये है. केवल अर्थघटन नहीं किया जाता है.

ऐसा नहीं करेंगे तो क्या होगा?

इतिहासका पुनरावर्तन होगा.

यदा तदा दुश्मनके कुकर्मोंको क्षमा किया है तब देशको सहन करना पडा है.

(१) नहेरुने प्रेमभाव रखके चीनकी लश्करी घुसपैठकी उपेक्षा की तो चीनने भारतकी ९१००० चोरस मील धरती पर अधिकार जमा लिया. हमारे हजारों जवान बेमौत मरे.

(२) इन्दीरा घान्डीने पाकिस्तानके साथ बेवकुफी बतायी और सिमला करार किया जिससे पाकिस्तानने जो खोया था वह सब पा लिया. बंग्लादेशने अपना देश पा लिया और एक करोड बीन बंगाली मुस्लिमोंसे छूटकारा भी पा लिया जो आज भारतके शिर पर है. १९७१में भारतके सैन्यने पायी हुई विजयके कारण, इन्दिरा इतनी सीमा तक सशक्त बनी थी कि वह पाकिस्तान, बांग्लादेश और कश्मिरके साथ जो चाहे वे शर्तें लागु कर सकती थीं. यदि इन्दिरा चाहती तो पूरे कश्मिर पर भारतका अधिकार स्थापित करके कलम ३७०को खत्म कर सकती थी. सिमला करार एक व्यंढ करार था. आज पाकिस्तान भारत पर आतंकी आक्रमण करता है. इन्दिराकी दुश्मन देशको क्षमा करने के कारण हजारों भारतीय जवानोंकी सहादत पर पानी फिर गया. और दुश्मनके आतंकोंसे भी हजारो बेमौत मरे.

(३) मोरारजी देसाईने पक्ष विरोधी प्रवृत्तिके लिये चरणसिंघको मंत्रीमंडलसे निष्कासित कर दिया था. चरणने क्षमायाचना की. अटल बिहारी बाजपाईने मोरारजी देसाईको कहा कि उनको माफ कर दो. मोरारजी देसाईने, बाजपाईके कहेने पर चरणको माफ किया और उसको फिरसे मंत्री मडलमें लिया.

(४) चरण सिंघने अपना एक गुट बनाया. इन्दिरा के उपरकी शाह कमीशनकी कार्यवाही आगे न बढायी और इन्दिराका सहयोग लेके मोरारजी देसाईकी सरकारका पतन करवाया. उसी इन्दिराने चरण सिंघकी सरकारको दिये हुए समर्थनको प्रत्याहृत करके चरण सिंघकी सरकारका पतन किया.

(५) राहुल गांधी जब जाली पासपोर्ट और नकदके साथ युएसमें पकडा गया तो बाजपायीने उसको मुक्त करवाया. उसीके कारण नहेरुवीयन कोंग्रेसको जिवनदान मिला. देशको १० साल तक लुटनेका एक अधिक अवसर नहेरुवीयन कोंग्रेसको मिला.
जिन्होंने प्रतिस्पर्धीको माफ किया उनको सहन करना पडा. नहेरु और इन्दिराने विदेशी दुश्मनोंको माफ किया, इससे देशको आज भी सहन करना पडता है.

मोरारजी देसाईने चरणसिंहको क्षमा किया तो देशको कोंग्रेस मुक्त शासन मिलनेमें ३५ वर्षकी देरी हो गई. इस अंतर्गत देशके लाखों मनुष्य बेमौत मरे और करोडों मनुष्योंको यातनाएं सहन करनी पडी. खरबों रुपयेकी तस्करी हुई वह वार्ता तो भीन्न ही है.

शिरीष मोहनलाल दवे

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नरेन्द्र मोदीको क्या बनना चाहिये? कौटिल्य अथवा पृथ्वीराज चौहाण?

कौटिल्यकी विशेषता क्या थी और पृथ्वीराज की विशेषता क्या थी?

Narendra Modi has to decide
कौटिल्यः
कौटिल्यमें दुश्मनको पहेचानने की प्रज्ञा थी.
कौटिल्य दुश्मनको कभी छोटा मानता नहीं था,
पडौसी देश दुश्मन बने ऐसी शक्यता अधिक होती है इस लिये उसकी गतिविधियों दृष्टि रखनी चाहिये क्योंकि वह प्रथम कक्षाका दुश्मन बननेके काबिल होता है.
दुश्मनको कभी माफ करना नहीं चाहिये,
ऐसा क्यों?
क्योंकि राष्ट्रहित सर्वोपरी है.

पृथ्वीराज चौहाण
पृथ्वीराज चौहाण भी एक देशप्रेमी राजा था. लेकिन वह दुश्मनके चरित्रको समझ नहीं पाया. उसने मुहम्मद घोरीको फेली बार तो हरा दिया, किन्तु बिना ही उसके चरित्रकी जांच किये भारतीय प्रणालीको अनुसरा और उसको क्षमा प्रदान की. वही मुहम्मद घोरीने फिरसे आक्रमण किया और पृथ्वीराज चौहानको हराया और उसका कत्ल किया. अगर पृथ्वीराज चौहाणने मुहम्मद घोरीको माफ किया न होता तो भारतका इतिहास अलग होता.
कौटिल्यने क्या किया था.
पोरस राजा देश प्रेमी था. उसने सिकंदरसे युद्ध किया. कुछ लोग ऐसा बताते है कि सिकंदरने पोरस को पराजित किया था. और सिकंदरने पोरसकी वीरताको देखके उसए संधि की थी. लेकिन यह बात तथ्यहीन है. वीरताकोई भारतका एकआधिर नही था. वीर योद्धा हरेक देशमें होते है. सिकंदर अनेकोंको जितता आया था लेकिन जो राजा हारे थे उनके साथ और उनकी जनताके साथ, उसका हमेशा आतंकित व्यवहार रहा था. पोरसने सिकंदरको संधिके लिये विवश किया था.और सिकंदरको हतप्रभः किया था.
सिकंदरके बाद सेल्युकस निकेतर सिकंदरकी तरह ही विश्वविजय करनेको निकला था. उस समय पोरसके बदले उसका भतिजा गद्दी पर था. उसने बीना युद्ध किये सेल्युकसको भारतमें घुसनेका रास्ता दे दिया. सिकंदर तो धननंदकी विशाल सेनासे ही भयभित हो गया था. लेकिन सेल्युकसने मगध पर आक्रमण कर दिया. जो सम्राट विश्वविजयी बनके आया था वह मगधके चन्दगुप्त मौर्यके सामने बुरी तरह पराजित हो गया. किन्तु ये सब बातें छोड देतें है.
कौटिल्यने क्या किया. पोरसके भतीजेको हराया. उसने लाख क्षमाएं मांगी लेकिन कौटिल्यने उसको क्षमा नहीं किया और उसको हाथीके पैरके नीचे कुचलवा दिया. पोरसका भतिजा तो जवान था, वीर था, उसके सामने पूरी जिंदगी पडी थी. वह देशप्रेमी पोरस राजाकी संतानके बराबर था, अगर कौटिल्य चाहता तो उसको क्षमा कर सकता था किन्तु कौटिल्यने उसको क्षमा नहीं किया. क्यो कि जो देशके साथ गद्दारी करता है उसको कभी माफ किया नही जा सकता.

यदि आप इतिहासको भूल जाते है तो उसका पुनरावर्तन होता है.
साम्राट अकबरको आते आते तो भारतके मुस्लिम हिन्दुओंसे हिलमिल गये थे. जैसे हुण, शक, पहलव, गुज्जर हिन्दुओंसे मील गये थे. भारतके मुस्लिम भी उसी स्थितिमें आ गये थे. कोई लाख नकारे तो भी यह एक सत्य है कि मुघलयुग भारतका एक स्वर्णयुग था. इसमें औरंगझेब जैसा कट्टर मुस्लिम भी लंबे समय तक अपनी कट्टरताका असर रख पाया नहीं था.
मुघल बहादुरशाह जफर जिसके राज्यकी सीमा सिर्फ लालकिलेकी दिवारें थी उसके नेतृत्वमें हिन्दुओंने और मुस्लिमोंने १८५७का विप्लव किया. पूरे भारतके हिन्दु और मुस्लिम राजाएं उसका सार्वभौमत्व स्विकारने के लिये कृतनिश्चयी थे.
ऐसा क्यों था?
क्यों कि हिन्दुओंके लिये धर्म तो एक ही था जो मानव धर्म था. आप ईश्वरकी मन चाहे तरिकोंसे उपासना करें या न भी करें तो भी हिन्दुओंको कोई फर्क पडता नहीं था. (हिन्दु यह भी समझते हैं कि ईश्वरको भी कोई फर्क पडता नहीं है).
मुस्लिम लोग भी परधर्म समभाव ऐसा ही समझ रहे थे. आज भी देखो, ओमानका सुल्तान काबुस सच्चे अर्थमें हिन्दुओं जैसा ही धर्म निरपेक्ष है. हां एक बात जरुर है कि वह विदेशीयोंको अपने देशकी नागरिकता नहीं देता है. चाहे वह हिन्दु हो या मुस्लिम. क्यों कि देशका हित तो सर्वोपरी होना ही चाहिये. जो लोग ओमानमें पहेलेसे ही बसे हुए हैं वहांके नागरिक है उसमें हिन्दु भी है और मुस्लिम भी है. इस लिये ऐसा मानना आवश्यक नहीं कि, सारे विश्वकी मुस्लिम जमात अक्षम्य है.

लेकिन भारतमें क्या हुआ?

अंग्रेजोंने खुदके देशके हितके लिये हिन्दु मुस्लिमोंमें भेद किये. सियासती तौर पर जीन्नाको उकसाया. नहेरुका भी कसुर था. नहेरु सियासती चालबाजीमें कुछ अधिक ही माहिर थे.
महात्मा गांधी के पास सबसे ज्यादा जनाधार था.

महात्मा गांधी के पास निम्न लिखित विकल्प थे
(१) अभी स्वतंत्रताको विलंबित करो, पहेले देशको और नेताओंको व्यवस्थित करो.
किन्तु यह किसीको भी स्विकार्य नहीं था. क्यो कि कोमी हिंसा ऐसी भडक उठी थी कि
नजदिकके भविष्यमें वह बीना विभाज किये शक्य ही नहीं थी.
(२) देशको फेडरल युनीयनमें विभाजीत करो जिसमें होगा पाकिस्तान, हिन्दुस्तान. ये दो देश संरक्षण और विदेशी मामलेके सिवा हर क्षेत्रमें स्वतंत्र होंगे. फेडरल युनीयन का हेड कोई भी हो.
नहेरुको यह स्विकार्य नहीं था क्यों कि उनको जीन्नाको चपरासी के स्थान पर रखना भी स्विकार्य नहीं था.
सरदार पटेलको और महात्मा गांधी इसके पक्षमें नहीं थे क्यों कि यह बडा पेचिदा मामला था. बहुत सारे स्थानिक राजाएं अपनी स्वायत्तता एक अलग देश की तरह ही रखना चाहते थे. ऐसी परिस्थितिमें देशमें अनेक जटिल समस्याएं उत्पन्न हो सकती है जो सदीयों तक उलझ नहीं सकती थी.
(३) फेडरल युनीयन हो लेकिन उसका नंबर वन पोस्ट पर जीन्ना हो.
नहेरुको यह स्विकार्य नहीं था. वे इस हालतमें देशके टुकडे टुकडे करने को भी तैयार थे.
(४) एक दुसरेसे बिलकुल स्वतंत्र हो वैसे देशके दो टुकडे स्वतंत्र हो. हिन्दुस्तान और पाकिस्तान. जनता अपनी ईच्छाद्वारा पसंद करें कि अपने प्रदेशको कहां रखना है ! हिन्दुस्तानमें या पाकिस्तान में?

नहेरुको यह चौथा विकल्प पसंद था. नहेरुने अपनी व्युह रचना तैयार रक्खी थी.

चौथे विकल्पको स्विकारनेमें नहेरुको कोई आपत्ति नहीं थी. हिन्दुस्तानमें नंम्बर वन बनना नहेरुके लिये बायें हाथका खेल तो नहीं था लेकिन अशक्य भी नहीं था. उन्होंने कोंग्रेसमें अपना सोसीयालिस्टीक ग्रुप बना ही लिया था.

नहेरुने गांधी और सरदारको प्रच्छन्न रुपसे दो विकल्प दिया.

या तो मुझे नंबर वन पोस्ट दो. नहीं तो मैं कोंग्रेसको विभाजित करके बचे हुए देशमेंसे अपना हिस्सा ले लुंगा और उसके बाद बचे हुए हिस्सेमें भी आग लगाके जाउंगा कि दुसरे नेता जाति आदि लोग अपना हिस्सा भी मांगे.

पक्षके नेताके रुपमें नहेरुका समर्थन किसी भी प्रांतीय समितिने किया नहीं था तो भी नहेरु अपने आवेदन पर अडग रहे.

महात्मा गांधीको नहेरुकी व्युह रचना समझमें आगयी थी.
महात्मा गांधीने कोंग्रेसको विलय करके उसको लोकसेवा संघमें परिवर्तन करने का निश्चय कर लिया. उन्होने सरदार पटेलको विश्वासमें ले लिया कि वे जब तक स्थानिक समस्याएं हल न हो जाय तब तक वे कोंग्रेसको विभाजित होने नहीं देंगे.
गांधीजीको मालुम हो गया था कि खुदकी जान कभी भी जा सकती है.

इसलिये महात्मा गांधीने २७वीं जनवरी १९४८में ही आदेश दे दिया की कोंग्रेसको एक राजकीय पक्षके स्थान पर अपना अस्तित्व समाप्त करना है. उन्होने इस दरम्यान लोकसेवा संघका संविधान भी बना दिय था.

नरेन्द्र मोदीको चाणक्य बनना है या पृथ्वीराज

अगर नरेन्द्र मोदीको चाणक्य बनना है या पृथ्वीराज चौहाण, इस बातकी चर्चा करते समय हमें कोंग्रेस और नहेरु की बातें क्यों करें?
भारतमे हमने और हमारे नेताओंने अंतिम सौ सालमें जो क्षतिपूर्ण व्यवहार किया, या जो क्षतिपूर्ण व्यावहार हो गया या करवाया गया उनको हमें याद रखके आगे बढना है.

यदि हम याद नहीं रक्खेंगे तो वैसी या उससे भी अधिक गंभीर क्षतियोंका पुनरावर्तन होगा, और भावी जनता हमे क्षमा नहीं करेंगी.

अंग्रेजोंकी नीतियां और उनका पढाया हुआ क्षतियुक्त इतिहासः
अंग्रेज तो चले गये, किन्तु उनकी विचारधारा के आधारपर उन्होने जो तीकडं बाजी चलायी और हमारे बुद्धिजिवीयोंने जो स्विकार कर लिया, ऐसे तथ्योंको हमे उजागर करना पडेगा. इतिहासके पन्नोंसे उनको निकालना नही है लेकिन उसको एक मान्यताके आधार पर उसके कदके अनुसार काट देना है. हमारे भारतीय शास्त्रोंके आधार पर तर्कपूर्ण रीतिसे इतिहास पढाना है.
इसका एक मानसशास्त्रीय असर यह भी होगा कि भारतमें जो विभाजनवादी तत्व है वे विरोध करने के लिये गालीप्रदानके साथ आगे आजायेंगे. उनको पहेचानना है और उनको सियासती क्षेत्रसे निकालना है. वे तर्क हीन होनेके कारण ध्वस्त ही हो जायेंगें. भारतमें एक हकारात्मक युग का प्रारंभ होगा.
https://www.youtube.com/watch?v=x4Vh0cBVPdU ancient scientific knowledge of India: A lecture delivered by CSIR scientist in IIT Chennai
https://www.youtube.com/watch?v=6YG6pXE8aDs Ancient Indian Scientists were all Rishis with High Spiritual Powers (Technology of Spirituality)
मुहम्मद घोरी क्षमाके पात्र नहीं है, किन्तु मुहम्मद घोरी कौन कौन है? और जयचंद कौन है.
मुहम्मद घोरी है; नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेतागण, उनके साथीगण, कश्मिरके नेतागण और दंभी सेक्युलर समाचार माध्यम के पंडितगण.

यह है कभी न माफ करनेवाली सांस्कृतिक गेंग
इनलोगोमें सामान्य बात यह है कि वे बीजेपीकी एक भी क्षति कभी माफ नहीं करेंगे. उसके उपरांत ये लोग विवादास्पद तथ्यों पर और घटनाओं पर पूर्वग्रह रखकर उनको बीजेपीके और नरेन्द्र मोदीके विरुद्ध उजागर करेगे. इनके लिये समय कि कोई सीमा नहीम है.
(१) १९४२में कोई अन्य बाजपाई नामक व्यक्तिने क्षमा-पत्र देकर पेरोल पर उतर गया था तो इन नहेरुवीयन कोंग्रेसीयोंने २००३-४ के चूनाव अंतर्गत भी इस बातको अटल बिहारी बाजपाई के विरुद्ध उछाला था.
(२) कोई दो पुलीस अफसरोंके बीच, कोई पिताकी प्रार्थना पर उसकी पुत्रीके साथ कोई अनहोनी न हो जाय इसके लिये निगरानी रखनेकी बात हो रही थी और उसमें सफेद दाढीवाले और काली दाढीवाले नेताका संदर्भ बोला गया था तो नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेता मनमोहन और उसके मंत्रीमंडलने स्पेसीयल बैठक बुलाके एक जांच कमिटी बैठा दी थी.
(३) एक लडकी कोई आतंकी संगठन के युवकोंके साथ मिलकर अपने मातापिताको बीना बतायें गुजरातकी और निकल गयी थी और तत्कालिन केन्द्रीय खुफियातंत्रने ही माहिति दी थी कि वे नरेन्द्र मोदीको मारने के अनुसंधानमें आ रहे है तो गुजरातकी पुलीसने उनको सशस्त्र होनेके कारण खतम कर दिया तो इन्ही नहेरुवीयन कोंगी नेतागण और उनके साथीयोंने शोर मचा दिया था.
(४) ऐसे कई पुलिस अफसरोंके खिलाफ ही नहीं किन्तु गुजरातके गृहमंत्री तकको लपेटमें ले के उनको कारवासमें भेज दिया था. मतलब कि, फर्जी केस बनाकर भी इन लोगोंको बीजेपीको लपेटमें लेके अपना उल्लु सीधा करनेमें जरा भी शर्म नहीं आती है. ये लोग तो मुहम्मद घोरीसे भी कमीने है.
(५) नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेताओंके इससे भी बढकर काले करतुतोंसे इतिहास भरा पडा है. इन्दिरा घांडीसे लेकर मनमोहन सोनीया तक. इसमें कोई कमी नहीं.
इन गद्दारोंको कैसे पीटा जाय?
(क्रमशः)
शिरीष मोहनलाल दवे
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