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नहेरुवीयन कोंग्रेसका वानरपन या विकास यज्ञमें हड्डीयां?

जब हम नहेरुवीयन कोंग्रेसका नाम लेते हैं तब हमें उनमें उनके सांस्कृतिक साथी पक्ष, ममता, माया, जया, लालु, करुणा, मुल्लायम, फारुख, आदि सभीको संम्मिलित समझना है. क्यों कि ये सब उनके सांस्कृतिक साथी है, जिनका उद्देश केवल येन केन प्रकारेण पैसा बनाना है, चाहे देशको कितना ही हानि क्यूं न हो. तदुपरांत सत्ताका दुरुपयोग भी करना ताकि अपने देशी विदेशी साथीयोंके साथ जो ठग विद्या द्वारा असामाजिक और सहदुःष्कर्म किये है उनसे उनकी भी रक्षा की जा सके. जैसेकी खुदके नेताओं अतिरिक्त इनकी जैसे कि धरम तेजा, मुंद्रा, सुकर बखीया, युसुफ पटेल, दाउद, एन्डरसन, क्वाट्रोची, वाड्रा आदिकी भी रक्षा करनी होती है.

किन्तु अभी तो हम वार्ता करेंगे भूमि अधिग्रहण विधेयक प्रस्तावकीः

भूमि विषयक और स्थावर संपत्ति विषयक समस्याओंका समाधान हो सकता है.

भूमि विषयक मानसिकता क्या है?

प्रणालीगत मानसिकता क्या है?

१ भारत एक कृषिप्रधान देश है,

२ किसान जगतका तात है,

३ किसान गरीब है,

४ भारत एक ग्राम्य संस्कृति वाला देश है.

५ ग्राम्य संस्कृति भारतकी धरोहर है,

६ भारत अपनी धरोहरका त्याग नहीं कर सकता.

यह ग्राम्य संस्कृति क्या है?

७ ग्राम्यप्रजा सीधे सादे प्राकृतिक वातावरणमें रहेती है,

८ उसकी प्राकृतिकताको हमें नष्ट नहीं करना है,

९ गांवमें बैल, गैया, भैंस, बकरी, गधा आदि मनुष्य समाजके उपर आश्रित पशुधन होता है,

गांवमें बैलगाडीयां होती है,

१० गौचर की भूमि होती है, पेड होते हैं, खेत होते है, गृह उद्योग होते है, आदि आदि

११ अब शासनका धर्म बनता है कि शासन ग्राम्य संस्कृतकी रक्षा करें. हां इतना परिवर्तन जरुर करें कि, उनको विद्युत उर्जा घरमें, ग्राम्य मार्ग पर, खेतमें भी मिलें.

१२ शासनका धर्म यह भी है कि उनको पीनेका शुद्ध पानी और खेतके लिये अदुषित पानी भी मिले, अन्न पकानेके लिये ईंधन वायु भी मिले. आवश्यकता होने पर उसको ऋण भी प्राप्त करवाया जाय.

१३ वैसे तो इनमेंसे कई चिजें ग्राम्य संस्कृतिकी धरोहर नहीं है, फिर भी शासनको सिर्फ नगरोंका ही विकास नहीं करना है, किन्तु ग्राम्यप्रजाका भी विकास करना है. इसके अतिरिक्त हमारी ग्राम्य संस्कृतिकी भी रक्षा करना है. इन सबमें किसानकी भूमिकाको उपेक्षित करना नहीं है.

१४ इसी प्रकार हमारी वन्य संस्कृतिकी भी रक्षा करना है,

यह वन्यसंस्कृति क्या है?

१५ वन्य संस्कृतिमें छोटे बडे वृक्ष है, वनवासी होते है, जो वन्य उपज पर अपना निर्वाह करते है. ये भी हमारी भारतीय संस्कृतिका एक अविभाज्य अंग है. हमें उनकी संस्कृतिकी भी रक्षा करनी है. हमें इन सबको शिक्षित भी करना है.

क्यों कि भारतीय संस्कृति महान है.

अवश्य हम महान है या थे. किन्तु हमे निर्णय करना पडेगा कि

१ हमें किसानोंके और वनवासीयोंके आर्थिक स्तरको उंचे लाना है या नहीं?

२ हमें उनको स्वावलंबी करना है या नहीं?

३ हमें ग्राम्य और वनवासी जनताको सरकार पर ही अवलंबित रहें ऐसा ही करना है या उसको इसमेंसे मूक्त भी करना है?

याद करो.

३०० वर्ष इसा पूर्वसे लेकर इ.सन. १७०० वर्ष तकके विदेशी यात्रीयोंने भारतके बारेमें लिखा है कि, भारतमें कभी अकाल पडता नहीं था.

उसका कारण क्या था?

भारतमें वन संपदा थी. यानी कि पर्वत और समतल भूमि पर वृक्ष थे. खेतोंके आसपास भी वृक्ष थे. नगरमें उपवन थे. इसके कारण नदीयोंमें हमेशा पानी रहता था. प्रत्येक ग्राममें सरोवर थे और इन सबमें पानी रहेनेसे कुओंका जलस्तर उंचा रहता था. वृक्षोंके होनेसे पर्वतों पर वर्षा का पानी अवरोधित रहेता था इसलिये पूर नहीं आते थे. वृक्षोंसे अवरोधित पानी धीरे धीरे नदीयोंमें जाता था. इसलिये नदियां पानीसे भरपूर रहेती थीं. भूमिगत पानीकी स्थिति भी ऐसी ही रहेती थी. कुओंमेसें पानी बैलके द्वारा निकाला जा सकता था.

पशुधन मूख्य माना जाता था. और इसके कारण प्राकृतिक खाद गोबरके रुपमें आसानीसे मिलजाता था. वृक्षकी कटाई घरेलु वपराशके लिये ही होती थी इसलिये वृक्षोंकी दुर्लभता नहीं बनती थीं. गोबरका भी इंधनके रुपमें उपयोग होता था.

सभी ग्राम्यसमाज प्रतिदिनकी आवश्यकताओंके लिये स्वावलंबी थे.

इसलिये आयात निकास की वस्तुंओंका  परिवहन न्यूनतम था. यंत्र और उपकरण संकिर्ण नहीं थे और पशु-शक्तिका उपयोग भी होता था. हम ग्राम्य समाजको एक संकुल के रुपमें समझ सकते हैं. जिनमें भीन्न भीन्न व्यवसायके लोग व्यवसायके अधार पर समूह बनाके रहेते थे. आज भी ऐसी रचना नकारी नहीं जाती. सब्जी मार्केट, कपडा मार्केट, रेडीमेड गार्मेन्ट मार्केट, हीरा बजार, विद्या संकुल, आवास, चिकित्सा संकुल आदि प्रकार विदेशोंमे भी बनाये जाते हैं.   

भारत एक विशाल देश था. जनसंख्या कम थी. उत्पादनका निकास हो सकता था. हर वसाहतमें व्यवसायीओंका एक महाजनमंडल रहेता था. जो अपने व्यवसाय की नीतिमत्ता पर निरीक्षण करता था.

किन्तु अठारवीं शताब्दीके अंतर्गत क्या हुआ?

भारतीय कारीगरोंकी उंगुलियां काट दी गई. ताकि हुन्नर मृतप्राय हो गया. भारत कच्चे मालकी निकास करने लगा और बना बनाया माल अयात करने लगा. गरीबी बढ गई. यह वार्ता  सुदीर्घ है. किन्तु इसका तारतम्य यह कि भारतकी अवनति हुई. प्राकृतिक आपत्तियोंमे भी वृद्धि हुई. वर्षा अनियमित होने लगी. अकाल पडने लगे.

नहेरुवीयन कोंग्रेसकी विघातक नीतियां

नहेरुवीयन कोंग्रेसने अंग्रेजोंकी नीति चालु रक्खी. समाजवादके नाम पर नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेताओंने मनमानी की. इतना ही नहीं किन्तु अत्यधिक प्रमाणमें अवैध रुपसे वनोंकी कटाई हुई. वन संपत्ति और उत्पादन नष्टप्राय हो गया. नदियां शुष्क हो गईं. वर्षा चक्र अनियमित हो गया. अकाल पडने लगे. आर्थिक असमानता बढ गई. नियम द्वारा चलने वाला शासन छीन्नभीन्न हो गया. कोतवाल चोरके साथ मिल गया और रक्षक भक्षक बन गया. कोंगीके सर्वोच्च नेताओं द्वारा किये गये भ्रष्ट आचारोंके असंख्य उदाहरण, हमने (१९७७-१९७९ और १९९९-२००४ के कालखंडोंको छोड कर) १९५१से २०१४ तक देखे हैं. हम उन ठगोंकी चर्चा नहीं करेंगे.

ग्राम्य रचनाकी पूरातन शैलीमें परिवर्तन लाना पडेगा.

भूमि अधिकार संबंधित मानसिकतामें परिवर्तन लाना पडेगा

भूमि संबंधित उत्पादनकी प्रणालीमें परिवर्तन लाना पडेगा,

ग्राम्य रचना कैसी होनी चाहिये? आवासोंकी रचना कैसी होनी चाहिये?

१ हमें आवासमें क्या चाहिये?

१.१ आवासमें खुल्लापन होना चाहिये,

१.२ आकाश दिखाई देना चाहिये,

१.३ छोटे बालकोंके लिये खेलनेकी जगह होनी चाहिये,

१.४ बडोंके लिये घुमनेकी जगह होनी चाहिये,

१.५ युवाओंके लिये खेलने की जगह होनी चाहिये,

१.६ अडोशपडोशके साथ संवादिता होनी चाहिये, यानी कि, कोम्युनीटी टाईप घरोंकी रचना होनी चाहिये,

१.७ प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षाका प्रबंध होना चाहिये,

१.८ उच्च शिक्षाके लिये सुदूर जाना न पडे ऐसा होना चाहिये,

१.९ प्रतिदिनकी आवश्यक वस्तुएं सरलतासे उपलब्ध होनी चाहिये,

१.१० शासकीय सेवाएं सरलतासे उपलब्ध होनी चाहिये,

१.११ जनसुरक्षा सेवा उपलब्ध और विश्वसनीय होनी चाहिये,

१.१२ व्यवसाय, सेवा, आवास और शिक्षणमें मानवीय अभिगम होना चाहिये,

१.१३ पर्यावरणमें संतुलन होना चाहिये.

हमें इन सभी आवश्यक बंधनोंसे ठीक तरहसे अवगत होना पडेगा. इस विषयमें अवगत होनेके लिये हमें खुल्लापन रखना पडेगा. यदि  आजकी स्थिति और आजकी मानसिकता चालु रही तो भविष्य कैसा भयानक हो सकता है वह समझना पडेगा.

भारत विभाजित हो गया है. जनसंख्यामें अधिक वृद्धि हुई है. जनसंख्याके उपर नियंत्रण लानेमें कुछ और दशक लग सकते है. कुछ धर्मके लोग स्वयंकी जनसंख्याके नियंत्रणमें मानते नहीं है. उनकी कार्यसूचि भीन्न है. उनकी मानसिकता में परिवर्तन करनेमें दो तीन दशक लग सकते हैं. सभीको साक्षर करना पडेगा और सबको काम देना पडेगा. उत्पादन बढाना पडेगा. असामाजीक तत्वोंको नष्ट करना पडेगा.

भूमिके महत्वसे अवगत होना आवश्यक है

भूमिका व्यय

१.१ पृथ्वीपर भूमिमें वृध्धि नहीं हो सकती. किन्तु भूमिमें सुधार हो सकता है. बंजर, क्षारयुक्त, उबडखाबड भूमिको नवसाध्य कर सकते हैं. मार्गों और रेल्वेकी आसपासकी भूमिको सब्जी भाजी के लिये उपयोगमें ले सकते है. छोटे बडे टापूओं पर बिनवपराश की भूमिको साध्य कर सकते है.

१.२ भूमिका व्यय बंध कर सकते है.

१.३ झोंपडपट्टी भूमिका व्यय है, एकस्तर, द्विस्तर, त्रीस्तर, आदि कमस्तरवाले आवास और संनिर्माण भूमिका व्यय है.

१.४ इतना ही नहीं भूमि पर अन्नपैदा करना भी भूमिका व्यय है.

१.५ अन्न और घांस एक स्तरीय उत्पादन है. जैसे लघुस्तरीय आवास निर्माण और लघुस्तरीय व्यवसाय वाले संकुल निर्माण, भूमिका व्यय है उसी तरह अन्न जैसे एक स्तरीय उत्पादनके लिये भूमिका उपयोग भी, भूमि संपदाका व्यय है.

१.६ आवास और व्यवसाय संकुल निर्माणको बहुस्तरीय बनाओ.

१.७ अन्न और घांस के उत्पादन के लिये बहुस्तरीय कृषि-संकुल बनाओ.

१.८ भूमिका उपयोग केवल वृक्षके लिये करो. वृक्ष हमेशा बहुस्तरीय उत्पादन देता है. तदुपरांत वह प्राणवायु देता है, जलसंचय करता है, भेज-उष्माका नियमन करता है,और उसका समूह् मेघोंको खींचता है. पक्षी, जिव जंतुओंको आश्रय देता है और ये जिव जंतु परागनयन द्वारा फल, सब्जी और अन्नका उत्पादन बढाता है. वृक्ष इसके अतिरिक्त मधु, गुंद, खाद और लकडी देता है.

अन्नका और घांसका उत्पादन कैसे करेः

१ आज कस्बों में और उसके समीपकी भूमिका भाव रु. १००००/- (दश सहस्र) प्रति मीटरसे कम नहीं है. यदि आप सुचारु प्रणालीसे बहुस्तरीय व्यवसायिक और आवासीय संकुलका निर्माण करो तो संनिर्माणका मूल्य (कंस्ट्रक्सन कोस्ट) रु ५०००/- से ६०००/- प्रति चोरस मीटर होता है. इसका अर्थ यह हुआ कि अन्न और घांसके उत्पादन के लिये बहुस्तरीय संनिर्माण लघुतर मुल्यका है.

ऐसे बहुस्तरीय कृषि संनिर्माण बनाना आवश्यक है.

१.२ बहुस्तरीय कृषि संकुल निर्माणके को लघुतर मूल्यका कैसे किया जाय? सुचारु प्रणाली क्या हो सकती है?

पूर्व निर्मित ईकाईयां (प्रीकास्टेड एलीमेन्टस) अनिवार्य है

१.३ पूर्व निर्मित ईकाईयां (प्रीकास्टेड एलीमेन्टस) जैसे कि स्तंभ इकाई (पीलर युनीट), फलक दंड इकाई (बीम युनीट), फलक इकाईयां (स्लेब एलीमेन्टस), असिबंध (आयर्न ग्रील), आदि, यदि निर्माण संसाधन उद्योगिक एकमोंमे पूर्व निर्मित किया जाय और उनका कद और मान शासननिश्चित प्रमाणसे उत्पादन किया जाय तो इन इकाईयोंका मूल्य अल्पतर बनेगा. संनिर्माणका समय, श्रम मूल्य भी कम भी लगेगा.

१.४ भूमि पर अधिकार केवल शासनका रहेगा.

शासन उसके उपयोगका अधिकार देगा. उपयोगके अधिकारका हस्तांतरण, उपयोग कर्ता कर सकेगा. किन्तु शासन के द्वारा वह हस्तांतरण होगा. इस प्रकार भूमिके सारेके सारे न्यायालयस्थ विवाद समाप्त हो जायेंगे.

१.५ आवास संकुल बहुस्तरीय रहेंगे और हरेक कुटूंबको खंडसमूह दिया जायेगा. जिनको मासिक अवक्रय (मोन्थली रेन्ट)के रुपमें या अवक्रय आधारित स्वामित्व (हायर परचेझ स्कीम) के रुपमें दिया जायेगा. स्वामित्वका हस्तांतरण भी शासनके द्वारा ही होगा.

१.६ उसी प्रकार कृषि संकुलके भी खंड समूह (प्रकोष्ठ समूह) होंगे और उसका हस्तांतरण भी उपरोक्त नियमोंसे होगा.

१.७ अद्यतनकालमें जो जर्जरित, या झोंपड पट्टीयां या कम स्तरवाले निर्माण है, उन सबका नवसंरचना करके आवास और व्यावसायिक संकुलोंका मिश्र संकुल बनाना पडेगा ताकि भूमिके व्ययके स्थान पर हमें अधिक भूमि उपलब्ध होगी और उसका हम सुचारु रुपसे वृक्षोंका उत्पादन कर सकेंगे.

१.८ आवास संकुलके निम्न स्तरोंमें व्यावसायिक वाणीज्य, गृहउद्योग, बाल मंदिर, प्राथमिकशाळाएं, माध्यामिक शाळाएं. उच्चमाध्यमिक शाळाएं, चूनाव व नोंधणी व जनगणना व सुरक्षा अधिकारीका कार्यालय रहेगा. हर स्तर पर एकसे अधिक सीसी टीवी केमेरा रहेगा.

१.९ जो अयुक्त (अनएम्प्लोईड बेकार) है, आवससे भी अयुक्त बने क्योंकि वे अपना उपकर नहीं दे पाये उनको सोने की जगह दी जायेगी और उनको कोई न कोई काम देके उनसे सोनेका और नहानेका उपकर प्रत्यावरुध (रीकवरी ओफ रेन्ट) किया जायेगा. यदि वह व्यक्ति विदेशका घुसपैठ है तो वो कारावासमें जायेगा और वहां उसके उपर स्थानिक सुरक्षादल कार्यवाही करेगा. जो अन्य राज्य से आता है उसको यदि वह निराश्रित है तो सोनेकी सुविधा मिलेगी.

१.१० जो कृषि-संकुल है, उसके निम्न स्तरोमें गौशाला रहेगी. उसके उपरके स्तरोमें घांस, अन्न, सब्जी, पुष्प, मधु, आदि का उत्पादन होगा.

१.११ आवस संकुलसे जो भी पानी आता है, उसको योग्य मात्रामें शुद्ध करके उसका भूमिगत उत्पादनमें उपयोग हो सकता है.

स्थावर संपत्ति के नियमोंमें आमूल परिवर्तन ही देशकी ९० प्रतिशत समास्याओंका समाधान है.

उपसंहारः

भूमि पर किसीका स्वामीत्व नहीं.

भूमि के उपर केवल उपयोगका अधिकार. उपयोगका प्रकार, शासन निश्चित करेगा. उपयोगके प्रकारमें परिवर्तनका अधिकार केवल शासनका रहेगा.

भूमिके उपयोगके प्रकारः

वृक्ष लगाना और उत्पादन करना.

वन, उपवन, भूमिगत क्रीडांगण

भूमिगत मार्ग, रेल मार्ग, जलमार्ग

सरोवर,

नहेरें,

विमान पट्टी,

नमक उत्पादन,

खनिज उत्पादन,

नये धार्मिक स्थल बनाने पर निषेध. केवल ऐतिहासिक धर्मस्थलोंका शासकीय अनुमतिके आधार पर विकास.

बहुस्तरीय संकुल जिसमें आवास संकुल, सेवा संकुल, गृह उद्योग संकुल, शैक्षणिक संकुल, लघु उद्योग संकुल, आदि. यदि शक्य है तो एक ही संकुल अनेक प्रकारके संकुलोंका समुच्चय हो सकता है.

बहुस्तरीय कृषि संकुल जिसमें अन्न, घांस, गौशाला, अप्रणालीगत उर्जा, सब्जी, मध, पुष्प, गोपाल आवास, कृषक आवास, कृषि आधारित गृह उद्योग,

बहुस्तरीय कृषि उत्पादन को प्राकृतिक आपदासे सुरक्षा मिलेगी. अन्य संकुलोके निस्कासित जलको शुद्ध करके टपक और फुहार सिंचाई द्वारा कृषि उत्पादन सुगम बनेगा.

एक ग्रामकी जनसंख्याके आधार पर एक ग्राम एक या दो संकुलका बना हुआ होगा. कोई भी संकुल १० स्तरसे कम नहीं होगा.

संकुल पर्यावरण सुरक्षाके आधार पर बना होगा. सभी शासकीय सुविधाएं और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होगी.

बहुस्तरीय कृषि संकुलके अपने हिस्सेको व्यक्ति हस्तांस्तर कर सकता है. किन्तु हस्तांतरण की प्रक्रिया शासनके द्वारा ही होगी. ठीक उसी प्रकार निवासके अपने हिस्सेको व्यक्ति हस्तांतरण कर सकता है. शासन, संकुलका वेब साईट रखेगा. और संकुलकी संपूर्ण अद्यतन माहिति उसके उपर उपलब्ध रहेगी.

शिरीष मोहनलाल दवे

अनुसंधानः  गुजरातीमें नव्य सर्वोदयवाद भाग १ से ५, एचटीटीपीः//डबल्युडबल्युडबल्यु.त्रीनेत्रं.वर्डप्रेस.कॉम टेग्झः भूमि, आवास, स्वामीत्व, उपयोग, शासन, सुरक्षा, सेवा, चूनाव बुथ विस्तार, संकुल, कृषि, घांस, वृक्ष, वन, स्वावलंबन, मानसिकता, ग्राम्य, पशु, गृह, उद्योग, प्रकोष्ठ, पूर्व निर्मित, इकाईयां, एलीमेन्ट संकुलकी कुछ आकृतियां

पूर्व निर्मित इकाईयां

STRUCTURE 04 village complex 04 AN ALREADY EXISTING SELF SUSTAINABLE COMPLEX VILLAGE Drg03 उपरोक्त व्यवस्था कृषि और आवास संकुलके लिये भी हो सकती है. एक कुटूंब एकसे ज्यादा सुनिश्चित नियमोंके अंतर्गत एक से अधिक प्रकोष्ठ ले सकता है. Drg01

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What is expected by the people of India from Narendra Modi

नरेन्द्र मोदी जब प्रधान मंत्री बन जाय, तब भारतीय जनता उनसे क्या अपेक्षा रखती है?

चूनाव आयोग सुधारः (रीफोर्म्स)

कार्यक्षेत्र और भौगोलिक विस्तार

चूनाव आयोग, भूमि और आवास सहयोग विभाग, जनगणना आयोग, स्थावर संपत्ति पंजीकरण (रजीष्ट्रार ओफ को ओपरेटीव सोसाईटीझ, लेन्ड रेकोर्ड), इन सभी कार्यक्षेत्रोंको चूनाव आयोगमें संमिलित किया जायेगा.

इसका नाम रहेगा चूनाव और स्थावर संपत्ति सहयोग आयोग

कृषि सहकारी संस्थाएं और गृह निर्माण सहकारी संस्थाएं, हालमें तो सहयोग संस्था पंजीकर्ता (रजीस्ट्रार ओफ को ओपरेटीव्झ सोसाईटीझ) के कार्य क्षेत्रमें है. न्यायालयके उपर भी जो भार रहेता है इसमें इसके संलग्न किस्से ही ज्यादातर होते है.

चूनाव इन सहयोगी संस्थाओमें भी होते है. सहयोगी संस्था कृषि, और सहयोगी संस्था गृह निर्माणअनुरक्षणमें, कपट (फ्रॉड), अनीति, और अनियमितता ज्यादा ही रहती है. इन कपट, अनीति और अनियमितताका निर्मूलन करनेके लिये ये सहयोगी संस्थाओंका, उसके सदस्योंका पंजीकरण (रजीष्ट्रेशन ऑफ मेम्बरशीप), विकास और अनुरक्षण (मेन्टेनन्स), समिति (कमीटी) के सदस्योंका चूनाव, और सदस्यताका हस्तांतरण (ट्रन्सफर ऑफ मेम्बरशीप) आदि, चूनाव आयोग के कार्यक्षेत्रमें लाना आवश्यक है.

चूनावमें विस्तार की जनगणना और व्यक्तिकी अनन्यता (आईडेन्टीटी), नागरिकता (सीटीझनशीप), आदि अनिवार्य है. इस लिये जनगणना आयोग भी इसमें संमिलित (मर्ज्ड) होना चाहिये.

चूनाव और जन सहयोग के निम्न लिखित स्तर रहेंगे

राष्ट्रीयस्तर (राष्ट्र) (सर्वोच्च आयुक्त)

राज्य स्तर (राज्य विस्तार) (उच्च आयुक्त)

संसद सदस्य स्तर, (संसद बैठक विस्तार) (जिला आयुक्त)

विधान सदस्य, (स्टेट एसेम्ब्ली बैठक विस्तार) (उपायुक्त)

खंडीय स्तर (वॉर्ड) (सहायक आयुक्त)

बुथ या बुथ समूह (विस्तार से १० बुथ विस्तार या ५००० के आसपास मतदाता) (बुथ अधिकारी)

यह एक उच्च से निम्नस्तर तक बिलकुल स्वतंत्र आयोग रहेगा. इसके कार्यालय, जनसभाखंड और कर्मचारीगण स्थायी होगे.

.   हेतुः चूनाव प्रचारमें सुधार, चूनाव खर्च पर पाबंदीः जब तक चूनावी प्रचारमें सुधार नहीं होगा और चूनाव में पैसेका महत्त्व दूर नहीं होगा तब तक नीतिमत्ता वाले और सेवाभावी लोग चूनाव जित पायेंगे नहीं. इसलिये हरेक अभ्यर्थीका (केन्डीडेटका) चूनाव प्रचार खर्च शासन उठायेगा.

. चूनाव आयोग कार्यक्षेत्र सुधारः ५००० मतदाताओंके भौगोलिक विस्तारके आधार पर एक बुथ या बुथ समूह या एक ग्राम्य विस्तार या नगरका एक विभाग में एक राजपत्रित अधिकारी (gazetted officer)  होगा.

इस राजपत्रित अधिकारीके पदका नाम बुथ अधिकारी  रहेगाः

बुथ अधिकारीका अपने भौगोलिक विस्तारमे निम्न लिखित कर्तव्य और उत्तरदायित्व

पंजीकरणः

अपने विस्तारकी स्थावर (जमीन और मकान आदि) मिल्कतोंका पंजीकरण यह अधिकारी करेगा.

जनगणनाः

निवासीयोंकी नोंध यह अधिकारी करेगा. इस के कारण जनगणना का पंजीकरण अपने आप होता रहेगा. ,

सहकारी संस्था पंजीकरण और संचालनः

सहकारी गृह निर्माण और अनुरक्षण संगठन कृषि सहकारी संगठन के कारोबार पर अनुश्रवण (मोनीटरींग) और उसका पंजीकरण और नियमन का काम यह अधिकारी करेगा. हरेक सहकारी संस्थाका प्रमूख यह अधिकारी होगा.

यह अधिकारी उपरोक्त संगठनोंके पंजीकरण और संचालन की कार्यवाही करेगा. तद उपरांत यह अधिकारी, उपरोक्त सहकारी संगठनोके सदस्योंका पंजीकरण, सदस्यता का हस्तांतरण, संशोधन, संस्थाका अनुरक्षणसदस्यसभा सामान्य सभा बुलाना और उसका संचालन और कार्यवाहीका अभिलेखन (रेकोर्ड) रखनेका काम करेगा.

ज्यादातर अनियमितता, अनीति और कपट स्थावर संपत्ति और सहकारी संगठन द्वारा ही होते है. ये सब कपट और अनीति बंद हो जायेगी. क्यों कि किसीभी कपट, अनीति और अनियमितता का उत्तरदायित्व (रीस्पोन्सीबीलीटी) इस अधिकारी पर रहेगा.

चूनाव प्रचार निरीक्षण और सभा संचालनः

जनप्रतिनिधित्व के अभ्यर्थीयोंका चूनाव प्रचार सभाओंका संचालन यह अधिकारी करेगा.

यह अधिकारी अपने द्वारा अपने विस्तारमें स्थित, प्रबोधित (सजेस्टेड), सूचित या सुझाये गये स्थान या सभाखंड में आवेदित (एप्लाईड फोर), जनसभाका संचालन करेगा और वक्तव्योंका और प्रचार साहित्यका रेकोर्ड रखेगा.

यह अधिकारी प्रश्नोत्तरी और समान मंचपर (कोमन प्लेटफोर्म) विभिन्न जनप्रतिनिधित्व के अभ्यर्थीयोंकी या उनके द्वारा सूचित व्यक्तियोंकी चर्चासभाओंका संचालन करेगा.

यह अधिकारी सरकार द्वारा संचालित दूरदर्शन पर, और समान मंच पर, सामूहिक और व्यक्तिगत व्याख्यान कार्यक्रम पक्षके अभ्यर्थी और अपक्षीय अभ्यर्थीयों के साथ चर्चा करके कर्यक्रम की अनुसूचना (शीड्युल ओफ प्रोग्राम) जारी करेगा. यह अनुसूचना सरकार वेब साईट पर पर जारी करेगी. प्रचार की यह अनुसूचना सभाखंड और बुथ कार्यालयमें प्रदर्शित रक्खी जायेगी.

हर अभ्यर्थीके चूनाव क्षेत्रकी एक वेब साईट बनाई जायेगी और जन सूची, मतदाता सूची, सदस्यता, हस्तांतरण, समय समय के अभ्यार्थी, अभ्यार्थी परिचय, चूनाव घोषणा, चूनाव और अनुसुचित प्रचार, प्रचार अभियान माहिति, चूनाव परिणाम, ईत्यादि माहिति वेब साईट पर उपलब्ध रहेगी.

. विधेयकमें पारदर्शिता और जनस्विकृति

भारतीय संविधान अनुसार, राजकीय पक्ष और जनता के बीचमें सीधा संबंध नहीं है. निर्वाचित व्यक्ति को जनप्रतिनिधि कहा जाता है. वैसे तो राजकीय पक्षको कई रियायतें मिलती है. इस लिये उनका उत्तरदायित्व बनता है. लेकिन वास्तवमें ऐसा दिखाई देता नहीं है.

जनप्रतिनिधिके लिये कोई व्यक्ति आवेदन (प्रार्थनापत्र) दें उसके पहले उसकी लोकप्रियता सिद्ध करने लिये एक प्रारंभिक सर्वेक्षण जरुरी है. पक्ष वाले तो अपना व्यक्ति खुद तय करेंगे और इसमें जरुरत पडने पर क्षेत्रीय अधिकारीकी मदद ले सकते है.

जो व्यक्ति अपक्ष है वह कितना लोकप्रिय है यह सुनिश्चित करने के लिये क्षेत्रीय अधिकारी बुथ अधिकारीयोंकी मददसे एक प्राथमिक सर्वेक्षण करवायेगा. और उनमें जो सर्व प्रथम पांच निर्वाचित बनेंगे वे ही अंतीम चूनावमें भाग ले सकते हैं.

. पक्षीय या अपक्षीय अभ्यार्थीका नीतिघोषणा (ईलेक्सन मेनीफेस्टो) पत्रः

जो विषय घोषणा पत्रमें संमिलित नहीं है उस विषय पर कोई जनप्रतिनिधि विधेयक (बील) ला सकता नहीं है. क्यों कि यह जनताके सामने पारदर्शिता नहीं है.

विधेयक का प्रारुप (ड्राफ्ट ओफ थे बील)

जो भी व्यक्ति या पक्ष या पक्षकी व्यक्ति जो जनप्रतिनिधित्व के लिये अभ्यार्थी है, वह अगर चूना गया तो अपने आगामी कार्यकालमें क्या क्या विधेयक लानेवाला है उसका प्रारुप क्षेत्रीय अधिकारी के पास उसको प्रस्तूत करना पडेगा. कोई भी अभ्यार्थीने या अगर उसके पक्षने ऐसा विधेयक का प्रारुप प्रस्तुत (सबमीट) करवाया नहीं है, तो ऐसा विधेयक वह सभामें (संसद, विधानसभा, परिषद, या कोई भी विधेयक पारित करनेका वाली अधिकृत सभा) प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है.

हालमें व्यवस्था ऐसी है कि जनप्रतिनिधि का पक्ष विधेयकका प्रारुप शासन ग्रहण करनेके पश्चात अपने कार्यकाल दरम्यान बनाती है और परिषद में प्रस्तुत करके पारित (पास) करवाती है. वास्तवमें जनताके साथ यह एक बेईमानी है. जनताकी आवाज इसमें प्रतिबिंबित होती नहीं है. इतना ही नहीं इस प्रक्रीयामें पारदर्शिता नहीं है.

आपात स्थितिमें विधेयक

अगर आपात स्थितिमें कोई विधेयक की जरुरत पडी तो, राष्ट्रीय चूनाव आयूक्त ऐसे विधेयकके प्रारुपको जनताके सामने प्रसिद्ध करेगा औरहां”, “नाऔरतटस्थ” (यस, नो, कान्ट से) में जनमत लेगा.

अति आपात स्थितिमें विधेयक

अगर अति आपातकालकी स्थिति है तो राष्ट्रपति इसके उपर अपना अभिप्राय देगा और अध्यादेश (ओर्डीनन्स) जारी करेगा. इसको मासमें जनताके सामने रखना पडेगा. अगर जनताने ५०+ प्रतिशतसे नामंजुर किया तो शासक पक्षको सत्ता त्याग करना पडेगा. अगर ऐसा नहीं है तो सरकार चालु रहेगी.

सरघस, बडे विज्ञापन पट्ट, और दिवारों पर लिखने पर पाबंदीः

पक्षका अभ्यार्थी और अपक्ष अभ्यार्थी सिर्फ अपना चूनाव घोषणापत्र (जिसमें विधेयक का प्रारुप संलग्न होगा), अपना अंगत और व्यावसायिक सेवा विवरण (प्रोफाईल), अपनी कार्यशैली (गवर्नन्स स्टाईल) अपने विचार सिद्धांत (स्कुल ऑफ थोट्स एन्ड प्रीन्सीपल्स),  और वक्तव्य (प्रवचन) का विवरण दे सकता है. इसका मुद्रण (प्रीन्टींग) खर्च चूनाव आयोग उठायेगा. सभा खर्च भी चूनाव आयोग उठायेगा.

गैर सरकारी दूरदर्शन चेनलों पर चूनाव प्रचारका खर्च अभ्यार्थी के खाते में जायेगा. जितना खर्च सरकार अपने सरकारी दूरदर्शन चेनलों पर करेगी उतना खर्च जनतप्रतिनिधित्वका आभ्यार्थी कर पायेगा.

अगर अभ्यर्थी चाहे तो अपने चूनाव प्रचारकी दृष्यश्राव्य (वीडीयो) कृति (क्लीप) सरकारी दूरदर्शन चेनल को प्रस्तूत कर सकता है. चूनाव आयोग, पक्ष के चूनाव पत्र पर सूचित प्रक्रिया में संमिलित कर देगा. जनता उसको अपनी अनुकुलतामें देख लेगी.

कृषि और आवास सह्योग विभाग

ठीक उसी प्रकार कृषि और आवास सह्योग आयोगको चूनाव आयोगमें संमिलित करके संशोधन करना है.   

कृषि और आवास सह्योगी संस्था के विषयमें भी, निविदा (पब्लिक नोटीस), संस्थाका कार्य क्षेत्र, संस्था परिचय, सदस्यताकी पात्रताका मापदंडसंस्था पंजीकरण, सदस्य सूची, सदस्यकी माहिति, विकास और अनुरक्षण की समिति के सदस्यों की के चूनाव प्रक्रीया अनुसूचना और पूरी प्रक्रीया, विकास और अनुरक्षण लेखा (एकाउन्ट) और लेखा परीक्षा (ऑडीट) विवरण, समिति सभा, सामान्य सभा, सभा घोषणा प्रक्रीया (एकोर्डीग टु स्टेच्युटरी प्रोवीझन्स फोर कोलींग फोर मीटींग), वक्तव्य नोंध, आदि सभी व्यवहार बुथ अधिकारी करेगा और सभी प्रक्रिया वेब साईट पर उपलब्ध रहेगी.

प्रकिर्णः

बुथ अधिकारी, व्यक्तिकी अनन्यताका प्रमाणपत्रः

इस क्षेत्रके निवासीकी छबी, कद, जन्म तीथी, आदि और गोपित प्रक्रीयासे रखा हुआ अंगुलीयां छाप, नेत्र छाप, हस्ताक्षर छाप आदि अनन्यताका पंजीकरण क्रमसंख्यावाला अनन्यताका प्रमाणपत्र कार्ड बनायेगा और देगा.

दस्तावेजों का नोटराईझेशन और पंजीकरण

बुथ अधिकारी, स्थानिक दस्तावेजोंका नोटराईझेशन और पंजीकरण करेगा,

बुथ अधिकारी, स्थानिक स्थावर संपत्तिका, सर्वेक्षण, मानचित्र, हस्तांतरण, बंधक विलेख, आदि निष्पादित और पंजीकरण करेगा.  

बुथ अधिकारी, स्थानिक व्यक्तिओंकी प्रतिज्ञा पत्र, और जिम्मेवारी पत्र, आदि दस्तावेज निष्पादित करेगा और पंजीकरण करेगा.

स्थान और कार्योंका पंजीकरण 

उत्पादनबिक्रीवहनसूचनाशिक्षणव्यापारीसेवाअभिकरण आदि संस्था, व्यक्ति, व्यक्ति समूह को अपना कार्यस्थल, स्थानांतरण, हस्तांतरण और कर्मचारीके विवरण का एक सूचित आवेदन पत्र प्रस्तूत करना पडेगा और उसका पंजीकरण करवाना पडेगा. बुथ अधिकारी एक आधारभूत वेब साईट रखेगी और एक मानचित्र के अंतर्गत सभी विवरण जनता देख पायेगी. बुथ अधिकारी इस वेब साईटको अद्यतन रखेगा. जो संस्था व्यक्ति और व्यक्ति समूह, जन लोक के साथ व्यवहार है, उनके बारेमें जनता के प्रति पारदर्शिता होनी चाहिये.   

यह एक रुपरेखा है और इसको नियमबद्ध भाषामें रखकर भारतीय संविधानमें सामेल करना है.

शिरीष मोहनलाल दवे

टेग्झः चूनाव आयोग, संशोधन, सुधार, जन, मतदार, सर्वेक्षण, जनप्रतिनिधि, पंजीकरण, अनन्यता, प्रमाणपत्र, जनगणना, क्षेत्र, विधेयक, अभ्यर्थी, आवेदक, आवेदन, राजपत्रित, अधिकारी, बुथ, खंड, जिला, तहेसील, उच्च, सर्वोच्च, ग्राम, नगर, स्थावर,  संपत्ति, सदस्य, सदस्यता, हस्तांतरण, कृषि, मानचित्र, खर्च, लेखा, विवरण, बंधक विलेख, परीक्षा,

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