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Posts Tagged ‘कौन हिंदु’

२०२४में गद्दारोंको हरानेकी व्यूह रचना – १

गद्दरोंको हराना है तो गद्दारोंको पहेचानना पडेगा.

गद्दार (देश द्रोही) को कैसे पहेचाना जाय?

गद्दारकी एततकालिन प्रवर्तमान परिभाषा तो यही होना चाहिये कि जो अपने स्वार्थके लिये भारतवर्षका अहित करने पर काया और वाचासे प्रत्यक्ष या परोक्ष रुपसे प्रवृत्त है, वह गद्दार है.

गद्दारका परोक्ष रुप क्या है?

हिंदुओंको कैसे भी करके विभाजित करना जैसे कि, विचार, ज्ञाति, क्षेत्र, भाषा, लिपि, जूठ, वितंडावाद (कुतर्क) , फर्जी वर्णन (false and prejudicial narratives), … ब्लोगका हिन्दु विरोधी, बीजेपी नेता विरोधी अयोग्य और विवादास्पद शिर्षक बनाना …

किंतु पता कैसे चले कि फलां फलां शिर्षक या विषय अयोग्य है?

जी हांँ … सही विषय, सही वर्णन, सही शिर्षक, आदि का चयन करना सरल नहीं है . लेकिन एक बार विचार कर लेना कि हमारे कथनका क्या असर पडनेवाला है. हमारे कथनसे हिंदुओंका कोई एक वर्ग अपमानित तो नहीं होनेवाला है न!!

कौन हिंदु है?

जो व्यक्ति समज़ता है कि मेरा धर्म (कर्तव्य) “मेरा देश भारतका हित सर्व प्रथम” है वह हिंदु है. भारतवर्ष से प्रथम अर्थ है प्रवर्तमान १९४७का सीमा-चिन्हित भारत. मेरा भारत वह भी है जो वायु-पुराण (वायुपुराण क्यों? क्यों कि वह पुराणोमें सबसे प्राचीन है) में भूवनविन्यासके अध्यायोंमें उसका वर्णन किया हुआ है. वह है भारतीय संस्कृतिका विस्तार. अर्थात जंबुद्वीप.

भारतीय संस्कृतिसे क्या अर्थ है?

मानव समाजको उन्नति की दीशामें ले जानेवाली विचारधाराका आदर और ऋषियों द्वारा पुरस्कृत या प्रमाणित आचारधारा का कार्यान्वयन (Execution).

सनातन धर्ममें वर्णित विचार धाराएं प्रति आदर, वेद उपनिषद, गीता, जैन, बौद्ध, ब्राह्मण (ब्रह्मसे उत्पन्न ब्रह्म स्वरुप ब्राह्मण यानी महः देवः यानी अग्नि यानी रुद्र यानी विश्वदेव यानी विश्वमूर्त्ति यानी उसका प्रतिकात्मक रुप शिव और शक्ति यानी पुरुष-प्रकृति यानी तात्त्विक रुपसे वैश्विक परिबलोंके साथ ऐक्यकी साधना. शक्ति – सूर्य- पंचमहाभूत … अद्वैतवाद.

ज्ञान, शौर्य, कर्म और कला मेंसे किसी एकके प्रति अभिरुचि द्वारा आनंद प्राप्ति. अपनी खुशीके लिये किसीको कष्ट न पहोंचे उसका खयाल रखना. और इस तरह समाजको समयानुरुपसे उत्तरोत्तर विकसित करना. कटूता विहीन तर्कशुद्ध संवाद, यह है सनातन धर्म जो प्रकृतिको साथमें रखके अहिंसक (कमसे कम हिंसक) समाज के प्रति गति करता है. कायरता और हिंसाके बीचमें यदि चयन करना है तो हिंसाका चयन करना है.

वेद और पुराण के दो श्लोक हमे कहेते हैं कि,

मा नः स्त्येनः ईशतः (हम पर चोरोंका शासन न ह. ऋगवेद).

इससे स्पष्ट होता है कि जो अगणित कौभांडकारी कोंगी, माफिया मुल्लायम, चाराचोर लालु, रीलीफ फंडमें कौभांड, शारधा, नारदा … आदि कौभांडमें सहभागी एवं आतंकवादी ममता, उद्धव सेना, शरद सेना, … के शासनका हमें विरोध करना है और नष्ट करना है.

आत्मनः प्रतिकुलानि परेषां न समाचरेत. (जो हमारे लिये प्रतिकुल है वह दुसरोंके उपर न थोपें. कूर्म पुराण)

ममताने हजारों हिंदुओंकी ह्त्या की, और एक लाख हिंदुओंको उनके घर जलाके भगा दिया. कारण केवल यही था कि उन हिंदुओंने ममताके पक्षको मत नहीं दिया था. इसके लिये ममताको जितना भी दंडित किया जाय, वह कम ही है.

आम जनता यानी कि, हम, जो स्वयंको राष्ट्रवादीमानती है उनका क्या धर्म है?

(१) लोकतत्र वाले देशमें जनताको जागृत करना और राष्ट्रवादी नेताओंके लिये हकारात्मक वातावरण तयार करना,

(२) राष्ट्रविरोधी तत्त्वोके उपर सातत्य पूर्वक उनकी क्षतियोंके उपर और दुराचारोंके उपर आक्रमण करना,

(३) राष्ट्रवादी नेताओंकी तथा कथित क्षतियोंको गुह्य रखना. या उन चर्चाओंमे मोड ला देना यानी कि विषयांतर कर देना,

(४) अप्रासंगिक और मृत विषयों पर चर्चा नहीं करना,

(५) हमारे ध्येयमें हमें स्पष्ट होना, और हमारा हर कदम हमारे ध्येय की दिशामें होना आवश्यक है.

सबसे बडी हमारी समस्या यह ही है कि हम राष्ट्रवादी लोग अधिकतर यह नहीं सोचते कि हमारी चर्चा मीथ्या की दिशामें जा रही है. और हममेंसे कई लोग इस परिस्थिति समज़ नहीं पाते हैँ. और अपनी शक्तिको और समयको बरबाद करते है.

चलो इसको समज़ें

(क्रमशः)

शिरीष मोहनलाल दवे

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