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कोंगी गेंग पुलवामा हमले पर अपनी रोटी शेकने लिये सज्ज है

कोंगी गेंग पुलवामा हमले पर अपनी रोटी शेकने लिये सज्ज है

सावधान भारत

जब पुलवामा पर आतंकी हमला हुआ था तो पूरे देशमें पाकिस्तानके विरोधमें आक्रोश प्रकट हुआ, तो अधिकतर जनता को लगा कि, कोंगी पक्ष इस हमले को सियासती मुद्दा नहीं बनायेगी.

लेकिन जो लोग कोंगीका चरित्र जानते है उनको तो मालुम ही था कि, कोंगी गेंग, इस घटनासे सियासती लाभ लेनेकी चेष्टा ही नहीं किन्तु भरपुर लाभ लेनेके लिये अफवाहें तक फैलाएगी.

वास्तवमें पुलवामा-हमला एक पूर्वनियोजित सुनियोजित हमला है इस बातको नकारा नहीं जा सकता.

जो जवान शहीद हो गये उनके शव अपने घर पहुंचे और उनका अग्निसंस्कार हो जाय, उसके पहेले ही कुछ कोंगी-गेंग के सदस्योंने (रणवीर सुरजेवाला, शशि थरुर, ओमर, केज्री … ) बीजेपी पर आक्रमण करनेका प्रारंभ कर दिया है.

जूठ बोलना कोंगीयोंकी और उनके मीडीया मूर्धन्योंकी लिये जन्मजात आदत है.

मैं शपथ लेता हूँ

फर्जी घटनाएं पैदा करना भी कोंगी गेंगके लिये स्वभाव जन्य है.

(१) आपने देखा होगा कि राफेल मामलेमें मीडीया गुरु “हिन्दु”ने बेशर्मीसे पीएमओ के एक अधिकारीकी भ्रमित करनेवाली टिपणी को दिखाया, और सुरक्षा मंत्री स्वयंकी टिपणीको छिपाया. रा.गा.को  (रा.घा. राहुल घांडीको) लगा कि उसको ब्रह्मास्र मिल गया. और रा.घा.ने उसको ले के पत्रकार परिषद भी बुलाई. मोदीको बदनाम करनेका परिपूर्ण प्रयत्न किया. ये पूरा नाटक जनताको गुमराह करने वाला आयोजनका एक हिस्सा था. “हिन्दु” के मालिकने तो कहा कि क्या दिखाना और क्या नहीं दिखाना वह उसकी मुनसफ्फी की बात है. यह कुछ दिखाना और कुछ न दिखाना और अपनी कार्यसूचिके अनुसार जनताको गुमराह करना कोंगी गेंगकी पूराना चारित्र है. बीजेपी ने इसका पर्दाफास किया.

(२) “भारतमें इतना काला धन है कि यदि उसको वितरित किया जाय तो हर भारतवासीको १५ लाख रुपये मिल सके” नरेन्द्र मोदीके इस कथनका इस प्रकार प्रसार किया कि बीजेपीके सत्ता पर आनेसे कालाधान पकडा जायेगा और भारतवासीयोंमे यह धन बाँटा जायेगा. “हर भारतवासीको १५ लाख रुपये मिलेगा”.

(३) गुजरातके २००२ दंगेके बाद जब अटलजी गुजरात आये तो तो उन्होंने बोला था कि “मुख्य मंत्रीका फर्ज होता है राजधर्म बजाना” बाजपाईके बगलमें पास बैठे नरेन्द्र मोदीने कहा “हम राजधर्म ही बजा रहे हैं”. तब अटलजीने कहा “हमें विश्वास है कि मोदीजी राजधर्म बजा रहे है”.

लेकिन मोदी विरोधियोंने “मुख्यमंत्रीका फर्ज होता है राजधर्म बजाना” इस बातको ही पकड लिया और वे हमेशा  बार बार इसीबातका प्रचार करते रहे और यही कहेते रहे कि मोदीने राजधर्म का पालन नहीं किया. ऐसी अफवाह फैलानेमें कोंगी-गेंग और बीजेपी-विरोधी अन्य गेंगे भी सामेल हो गयी थीं. आज तक ये जूठ चल रहे हैं.

(४) इन्दिरा गांधीने कोंगीका विभाजन करनेके समयमें ऐसा ही प्रचार किया कि; “मेरे पिताजीको तो बहुत कुछ करना था लेकिन ये बुढ्ढे लोग (कामराज, अतुल्य घोष, सादोबा पाटिल, मोरारजी देसाई … अदि) उनको करने नहीं देते थे. इन्दिरासे किसीने यह नहीं पूछा कि वह इसके आधारमें कुछ उदाहरण तो दें.  नहेरुका जनहित का कौनसा काम था  जो नहेरु करना चाहते थे, पर “उन बुढ्ढे लोगोंने नहेरुको न करने दिया हो.” मीडीयाको खिलाना पीलाना तबसे इन्दिरा गांधीने शुरु कर दिया था.

“मोदीको हटाना है” कोंगीका पुराना प्लान है

मणीशंकर अय्यर पाकिस्तान गये थे, और उन्होंने पाकिस्ताको खुलेआम कहा था कि, आपको मोदीको हटाना है. जब पाकिस्तानमें गवर्नमेन्ट, आतंकवादी संगठन, दाउद, आई.एस.आई. और सेना एक साथ हो तब “आपको मोदीको हटाना है” उसका मतलब साफ है कि भारतमें दंगा करवाओ, भारतमें आतंकवादी हमले करवाओ, भारतमें मोदी विरुद्ध माहोल बनवाओ या मोदीको मार दो.

कोंगी कहेती है;

“फर्जी बाते करना, निराधार आरोप करना और भारतके मीडीयाको खरिद लेना तो हमें खूब आता है, और आप यदि हमने दिखाये काम करोगे तो हमारा बीजेपीको हरानेका  काम अति आसान हो जायेगा.

“यदि मोदीको हम लोग कैसे भी हटा पाये तो, हमारी दुकाने फुलफेज़में चालु हो जायेगी और हमारे उपर जो न्यायिक कार्यवाही चल रही है वह भी समाप्त हो जायेगी.

“सी.बी.आई., न्यायतंत्र, चूनाव आयुक्त, ब्युरोक्रसी आदि तो हमारे पालतु पोपट है क्यों कि हमने इनके अधिकारीयोंका बहुत काम किया है और हमने उनकी सहायता भी बहूत की है. इसी लिये तो हम जनताको कहेते है और परोक्ष रुपसे इन संस्थाओंके अधिकारीओंको चेतावनी भी देते हैं कि यदि आपने हमारे विरुद्ध गंभिर कार्यवाही की तो याद रक्खो हम तुम्हें छोडेंगे नहीं. क्यूं कि हमने इनको पोपट बना दिया था, हमें डर है कि बीजेपीके ये लोग पोपट न बन जाय. इस लिये हम बीजेपी उपर (भले ही निराधार) आरोप लगा रहे है कि बीजेपीने इन संस्थाओंकी स्वतंत्रता छीन ली है. हम कैसे है, वह तो इन अधिकारीयोंको खूब मालुम है. हम जब पुरा “शाह जाँच आयोग”को और उनके संबंधित सभी दस्तावेजोंको तहस नहस कर सकते है तो ये न्यायालय, ब्युरोक्रसी, चूनाव आयोग, सी.बी.आई. क्या चीज़ है?  हमने क्या ६५ वर्ष के हमारे शासनमें जख मारा है?

“अब देखो हम क्या करने वाले है!!

“हमारे मूर्धन्य लोग चालाकी पूर्वक समाचार पत्रोंमें लेख लिखते रहेंगे;

“हमारे समाचार पत्र, हमारी लिये हमारे अनुकूल समाचारकी  शिर्ष रेखाएं प्रकाशित करेंगे या तो बीजेपीके प्रतिकुल समाचारों की शिर्ष रेखाएं बनाएंगे,

“हमारे कुछ लोग प्रो-बीजेपीका मुखवटा पहेनके कई सालोंसे बीजेपीमें घुसे हुए है;

ये बीजेपीके मुखवाटे वाले मोदीके उपर राम मंदिर निर्माणमें वचन न निभाना, वेद अनुरुप शिक्षाका प्रबंध न करना, वेदोंके अनुरुप संविधान न बनाना, उर्दु का सर्वनाश न करना, गौ-हत्या बंधी के अमल पर निस्क्रिय रहना, आदि के समर्थनमें लगातार चर्चा करते रहेंगे,   दुरात्मा गांधीको महात्मा क्यूँ कहेना, उसको राष्ट्र पिता क्यूँ कहेना?, गांधीने देशको विभाजित किया, गोडसेकी वीरताको पुनःस्थापित करो, शहीद भगत सिंहकी और गोडसेकी छबीको करन्सी नोटों पर स्थापित करो …. ऐसी चर्चा भी लगातार चलाया करेंगे,. बीजेपी, आरएसएसमें भी कई अल्पज्ञ, और अशिक्षित लोग है, उनका हमें सहारा मिलेगा और इससे हमारा उल्लु सीधा होगा. हम कोंगी गेंगवाले कोई कम नहीं है. हमने क्या वैसे ही हमारे बाल धूपमें सफेद किया है क्या? समज़ गये न, हम कौन है?

“हम कोंगी गेंगवाले राक्षस है. हम मायावी है. हमारा उल्लु सीधा कैसे करना वह हम खूब जानते है.

“आतंकवादी हमला करवाने तो हम सफल हुए. लेकिन थोडी हलकी रही.

“हम तो पूरे देशमें कोमी दंगा करवाने की ठानके बैठे थे. हमारे शासित राज्योंमें तो हमने थोडे दंगे करवानेकी कोशिस की, लेकिन हमारे शासित राज्योंमें हम अधिक दंगा नहीं करवा शकते यदि वे बीजेपी शासित राज्योंमें प्रसरते नहीं. इस लिये अभी यह काम हमने ठंडे बक्सेमें रक्खा है.

“हम कोंगी गेंगवाले सरासर जूठ द्वारा मोदीकी बुराई करते रहेंगे.

“ “राफेल” के विषयमें हम नरेन्द्र मोदीको चोर कहेते रहेंगे,

“नरेन्द्र मोदीने कोई भी विकास  नहीं किया और वह विकासका जूठ फैलाता रहेता है ऐसा कहेते रहेंगे,

“नरेन्द्र मोदीने दलित, किसान, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकोंके लिये कुछ भी नहीं किया ऐसा बोलते रहेंगे,

“नरेन्द्र मोदीने बेकारी बढाई ऐसा कहेते रहेंगे,

और खासम खास तो हम पुलवामा हमलेके बाद भी मोदीकी आँखें नहीं खूली, नरेन्द्र मोदी सिर्फ वाणीविलास करता रहा है और पुलवामा हमले बाद भी उसने निस्क्रियता दिखाई है. जब हमारे जवान मरते थे तब नरेन्द्र मोदी  नौका विहार करता था …  जब देशकी जनताने अपने चूल्हे बंद रक्खे थे तब नरेन्द्र मोदी गेस्टहाउसमें ज्याफत उडा रहा था … ऐसी तो कई बातें हमारे दिमागमें है उसको उजागर करते ही रहेंगे. कश्मिरकी स्थिति बिगाडने के लिये नरेन्द्र मोदी ही उत्तरदायी है. जब हमारा शासन था तब कश्मिरमें परम शांति थी और वह कश्मिरके लिये स्वर्णीम समय था. अब देखो, कश्मिरमें हररोज कोई न कोई मरता है.

शिरीष मोहनलाल दवे

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TV Anchor, Parliament Speaker and Nehruvian Congress

शंकास्पद या खराब, अकुशल और घटिया, प्रपंची और दुराचारी = टीवी चेनलका एंकर, संसदका अध्यक्ष और नहेरुवीयन कोंग्र्स

 टीवी चेनलका एंकरः

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टीवी एंकरका काम है कि कोई एक विषय उपरकी  चर्चा के लिये, चर्चाके विषय पर निष्णातोंमें कोई एक या अधिक व्यक्तिको आमंत्रित करना, तथा यदि विषय सियासती है तो सियासती पक्षोंके संबंधित प्रतिनिधिको  अपने सियासती पक्षकी नीतियोंसे अनुसार अपना पक्ष प्रस्तुत करें  और इस प्रकार चर्चा सुचारु रुप से चले.

चर्चाके अंतमें जनताको यदि कुछ निष्कर्ष  निकालना हो तो निकाल सके.

मान लिजिये विषय हैराहुल गांधीका नरेन्द्र मोदीसे गले लगना

इसमें चर्चाके मुद्दे क्या हो सकते हैं?

() क्या राहुल गांधीका नरेन्द्र मोदीसे गले मिलना एक नाटक था.

हाँ या ना

(.) यदि नाटक था तो यह नाटक कितना उचित था?

(.) यदि नाटक नहीं था तो राहुल गांधीका गले मिलनेका हेतु क्या हो सकता है?

(2) क्या राहुल गांधीका गले मिलना अपने पक्षकी परंपराके अनुसार था?

यदि एंकरको चर्चा सुचारु रुपसे चलानी है तोः

() एंकरको चर्चाके नियम सभी वक्ताओंको समज़ा देना चाहिये, जैसे कि प्रारंभमें वक्ताको अपना पक्ष रखनेके लिये मीनट मिलेगी. बादमें प्र्त्युतर के लिये दो मीनट मिलेगी और उपसंहारके लिये ३० सेकंड मीलेगा. अवरोध पैदा करने के लिये एक पूर्व सूचनाका एक पेनल्टी पोईन्ट और माईक पुनरावरोध (बंद करने के लिये)के कारण दो पेनल्टी पोईन्ट मिलेंगे.  

() यदि नियमका भंग किया तो क्या किया जायेगा वह भी वक्ताओंको बता देना चाहिये,

() एंकरको एक एक पोईन्ट पर सुनिश्चित समय देना चाहिये.

() “सुचारु रुप सेसभी व्यक्तियोंको पहेले तो मुद्दा स्पष्ट करवाना चाहिये.

() यह स्पष्टता कर देनेके बाद एंकरको योग्य और समान समय देना चाहिये

() जो व्यक्ति बोलता है वह यदि मुद्देको बाजु पर रख कर अन्य मुद्दे पर बोलने लगे  एक बार उसके ध्यान पर लाना चाहिये कि वह मुद्देसे हट रहा है.

()  वक्ताको सूचित करने पर भी यदि वक्ता बोलता रहेता है, तो उसको आगे बोलने देना चाहिये, लेकिन उसके बोलनेके बाद एंकरको जनताको बताना चाहिये कि उस वक्ताने मुद्देकी बात नहीं की. उसने मुद्देसे हटके बात की है.

() यदि कोई वक्ता अन्य कोई वक्ता बोलता है तब उसके साथ बोलने लगता है, या तो उसके बोलनेमें अवरोध पैदा करता है तो उस अवरोधक वक्ता (व्यक्ति) को चेतावनी (पूर्व सूचना वॉर्नींग) देना चाहिये,

() यदि पूर्वसूचनाके बाद भी वह अवरोध चालु रखता है तो उसका माईक बंद कर देना चाहिये.

() सभी वक्ताओंको कितनी पूर्व सूचना दी गई थी और किसने पूर्व सूचनाके बावजूद अवरोध चालु रखा था तो उसके पेनल्टी पोइन्ट कितने हुए यह बात एंकरको दर्शकोंको अंतमें बताना चाहिये.

अभी तो क्या होता है, कभी कभी एंकर अपनी मनमानी करके कभी वक्ता को अवरोध करने पर  रोकता है या तो नहीं रोकता है. कभी एंकर खुद चिल्लने लगता है. क्या एंकर अवरोध करने वाले वक्ता का माईक बंद नहीं कर सकता? यह काम  उपलब्ध संचालित तकनिकी से हो सकता है, यदि एंकर बिना गतिरोध चर्चा चलाना चाह्ता है तो.

संसदका अध्यक्षः

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संसदके अध्यक्षका भी उपरोक्त ही उत्तरदायित्व बनता है. उसके अतिरिक्त उसके पास तो विशेष अधिकार भी है कि वह सदस्यको दंडित भी कर सकता है.

संसदमें सामान्यतः माना जाता है कि सदस्योंको अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तूत करनेका अधिकार है.

सदस्यको अपनी प्रतिक्रिया प्रकट करनेका सुयोग्य तरिका होना आवश्यक है.

सदस्य जब अपना क्रम आवे तो वह बोल सकता है. किन्तु यदि;

सदस्य अपना स्थान पर खडा होके सूत्रोच्चार करे, या और, अन्य वक्ताकी प्रस्तूति पर अवरोध करे, या और, अपना स्थान   छोडके अध्यक्षके पास जाय, या और, अध्यक्षके सामने  प्रदर्शन करें तो इससे संसदकी कार्यवाही में गति रोध पैदा होता है.

ऐसा होने पर अध्यक्षको चाहिये कि वह एक बार, उस अवरोधक सदस्यको पूर्वसूचना दें और यदि सदस्य माने तो उसको,

बीचमें बोलने के लिये एक दिनके लिये निलंबित करें,

अपना स्थान छोडने के लिये दो दिनके लिये निलंबित करें

सूत्रोच्चार करने के लिये तीन दिनके लिये निलंबित करें

अध्यक्षके पास जाने के लिये एक सप्ताह के लिये निलंबित करें

यदि एक ही सत्रमें वह अपनी हरकतें तीन बार करता है तो उसको पूरे सत्रके लिये निलंबित करें

यदि मत देने की आवश्यकता पडी तो उसको सिर्फ मत देने की अनुमति मिल सकेगी.

जितने दिन सदस्यको निलंबित किया है उन दिनोंका भत्ता एवं वेतन काट दिया जायेगा.

नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेता कहेते हैं कि संसद चलाना सत्तारुढ पार्टीका कर्तव्य है तो  

अध्यक्षका कर्तव्य है कि वह इस प्रकार अपना कर्तव्य अदा करें

संसदके बाहर प्रदर्शन करनाः

कहीं भी प्रदर्शन करना हो तो उसकी एक कार्यवाही है.

आप एक प्रार्थना पत्र में मुद्देका विवरण करो, प्रदर्शन का कारण बताओ, क्या आपने यथा योग्य अंतिम अधिकार क्षेत्रकी व्यक्तिसे वार्तालाप लिया? वार्तालापमें आप किस कारणसे संतुष्ट नहीं है? वार्तालाप अभी चालु है? यदि हाँ तो किस कारणसे प्रदर्शन करना है? क्या आपके उपर हो रहा अन्याय न्यायालयके क्षेत्रमें नहीं आता है? यदि इन सबका उत्तर हकारात्म नहीं है तो प्रदर्शनकी अनुमति नहीं दी जायेगी और सरकारी (जनहितकी कार्यवाहीमें) अवरोध करने कारण आपकी गिरफ्तारी होगी और न्यायिक कार्यवाही होगी.

नहेरुवीयन कोंग्रेस और उसके सांस्कृतिक साथी पक्षः

lok sabha noise

रा.गा.ने पहेले ही कहा था कि हम हर हालतमें संसदको चलने ही नहीं देंगे.

नहेरुवीयन कोंगी लोग ऐसा कहेते है कि जब वे शासनमें थे और बीजेपी जब विपक्षमें था तो वह भी ऐसा ही करता था. लेकिन यदि विपक्ष ऐसा करता था तो वह बोलने देने पर करता था. यदि ऐसा नहीं था तो नहेरुवीयन कोंग्रेसीयोंको चाहिये कि वे उसकी चर्चा टीवी चेनलोंके द्वारा समाचार पत्रोंद्वारा  अपना पक्ष, प्रसंगोका संदर्भ देके जनताके सामने रखें.

चालु सत्रमें आपने देखा होगा कि जब प्रधान मंत्री प्रश्नोंका उतार दे रहे थे तब उनको रोकने के लिये नहेरुवीयन कोंगी नेताएं सातत्य पूर्वक अवरोध कर रहे थे. प्रधान मंत्रीका भाषण ज्यादातर सूत्रोचारसे ही अवरुद्ध रहा था. यह संसदकी, नहेरुवीयन कोंगीयों द्वारा लगातार हो रही अवमानना है.

नरेन्द्र मोदीको गले मिलना एक नाटक था

नरेन्द्र मोदीको गले मिलना एक नाटक था क्योंकि नहेरुवीयन कोंग्रेसकी यह परंपरा नहीं है. यदि नरेन्द्र मोदीके परिपेक्ष्यमें नहेरुवीयन कोंग्रेसकी बात की जाय, तो, नरेन्द्र मोदी के बारेमें उनके नेताओंके बयान क्या थे वह रेकर्ड पर है. उतना ही नहीं नरेन्द्र मोदी, जब गुजरातके मुख्य मंत्री थे तब गुजरातकी सुरक्षा अधिकारीयोंने, उनके मिलेइनपुटके आधार पर कडी सुरक्षाकी मांग की थी. उसके उपर केन्द्रीय गृह विभाग चपट्ट बैठ गया था और सुरक्षा प्रदान नहीं किया था. केन्द्रके पासभी इनपुट थे, तो भी उसने कुछ नहीं किया था. जब नरेन्द्र मोदी अपने अधिकारिक सुरक्षा वर्तुलसे बाहर आये तो बिहारमें ४५ मीनटके लिये बिलकुल सुरक्षा हीन थे.

इसके अलावा नहेरुवीयन कोंग्रेस, अपने विरोधीयोंपर कैसा अत्याचार करती है उसका इतिहास गवाह है. आपातकालमें मीडीया पर सेन्सरशीप लगाना, जयप्रकाश नारायणको मरणासन्न करना, हजारोंको कारावासमें धकेलना वह भी बिना गुनाह, विरोधीयोंके बारेमें गलत अफवाहें फैलाना जैसे कि, मोरारजी देसाई, वीपी सींग, नरसिंह राव, देव गौडा, अन्ना हजारे, बाबा रामदेव, किरण बेदी ….    

और अंतमें रा.गाने आँख मारके उसके साथीयोंको संदेश दिया कि मैंने कैसा इन लोगोंको बेवकुफ बनाया.

इससे नहेरुवीयन कोंग्रेसके नेतागण घटिया प्रपंची और दुराचारी सिद्ध होते है.

शिरीष मोहनलाल दवे

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