Feeds:
Posts
Comments

Posts Tagged ‘परिबल’

बीजेपी विरोधीयोंकी समस्या क्या है?

बीजेपी विरोधीयोंकी समस्या क्या है?

“प्रशस्ति पत्रोंकी वापसी, इसमें हम नहीं, मैं शर्मींदा हूँ, भारतके मुस्लिम सुरक्षित नहीं, अखलाक, पत्रकारकी हत्याएं, दलितों पर अत्याचार, व्यर्थ विमुद्रीकरणके कारण कई मृत्यु और आम आदमीको परेशानी, जीएसटी एक गब्बरसींग टेक्ष, राफेल डील, उद्योगकर्ताओंको खेरात, सुशील मोदी, माल्या आदिको अति अधिक ॠण देकर देशसे भगा देना, सरकारी बेंकोका एनपीएन उत्पन्न करना, मी टू, काश्मिरमें अशांति पैदा करना आदि ये सब मोदी सरकार द्वारा बनी समस्याएं हैं.” ऐसा सिद्ध कैसे किया जाय? यह बीजेपी विरोधीयोंकी समस्या है.

Image may contain: 11 people, people smiling, text

Image may contain: text

(मुझे मितु मितु करके मत बुलाओ. मुझे  मिताली कहो)

Image may contain: 2 people, people smiling

ऐसी कई बातोंको नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षने अपने पालतु कटार लेखकों द्वारा, एंकरों द्वारा, महानुभावो द्वारा हवा देके मोदी सरकारके विरुद्ध हवा बनानेका भरपूर प्रयत्न किया है ताकि जनताको यह संदेश मिले कि, नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्ष, जब शासनमें था तब तो देश खुशहाल था और देशमें शांति ही शांति थी.

सत्य क्या था?

किन्तु हम सब जानते हैं कि नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके शासन वास्तवमें कैसा था. विकासको तो रोकके ही रक्खा था और वही योजनाएं होती थीं और वे भी अति देरीसे, जिनमें नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके सर्वोच्च नेताओंके साथ अंडर टेबल डील हो सकता था. इन बातोंके तो कई उदाहरण है.

“विकास पागल है” नहेरु-इन्दिरा गांधी वंशी कोंग्रेसका सूत्र !!

बीजेपीके सत्तामें आनेके बाद, आम जनताको तो अब पता है कि विकास क्या है. लेकिन नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके नेताओंने विकासको पागल बताके विकासके विरुद्ध बोलना आरंभ कर दिया था.

नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके नेताओंको पता चल गया है कि विकासके विरुद्ध प्रचार करने से उनकी दाल गलने वाली नहीं है. इसलिये उन्होंने अपने पालतु समाचार माध्यमके तथा कथित विद्वानोंसे “गठ बंधन” जो नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके नेतागण, उनके सांस्कृतिक साथी पक्षोंके साथ करनेवाले हैं उसका गुणगान करना प्रारंभ कर दिया है. भूतकाल में “गठ बंधनवाली” सरकारोंने अच्छा काम किया था इस बातको मनवाने के लिये उनके शौर्यगीत सूनाना चालु कर दिया है.

“शेखर गुप्ता” एक तथा कथित मूर्धन्य कोलमीस्ट है. सोनेमें सुहागा यह है कि वे “ध प्रीन्ट” के मुख्य तंत्री भी है. लगता है उनको नरसिंह रावका [ जो नहेरुवीयन-{इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके एक अनहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)}  प्रधान मंत्री थे ]  कार्यकाल पसंद होगा. उस समय मनमोहन सिंह वित्तमंत्री थे. इस लिये नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्ष पुरस्कृत युपीएकी अर्थ नीति पसंद हो सकती है. शेखर गुप्ताजीने एक पुस्तक “ईन्डिया रीडीफाईन्स इट्स रोल” लिखा है. वैसे तो कई लोग तत्कालिन वित्त मंत्री को (मनमोहनको) उस समयकी अर्थनीतिके कारण श्रेय देते हैं. वैसे तो नरसिंह रावके वित्तसलाहकार सुब्रह्मनीयम थे और विश्वबंधु गुप्ता जो तत्कालिन आयकर विभागके महान आयुक्त थे उन्होने मनमोहन सिंहके अभिगम और उनकी मान्यताओंके विरुद्ध स्वानुभवके विषय पर काफि कुछ लिखा है. इन बातोंकी चर्चा हम नहीं करेंगे. हम इस समय हमारे उपरोक्त कटारीया भाई (शेखर गुप्ताजी) जो नरेन्द्र मोदीकी अर्थनीतिकी उपलब्धियोंको निरर्थक बताने पर तूट पडे है, और नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी यानी कि “गठबंधन वाली” सरकारोंने कैसा अच्छा काम किया था वह सिद्ध करनेके लिये अपना दिमाग तोड रहे हैं, उनकी बाते करेंगे.

नरेन्द्र मोदी हमेशा पूर्ण बहुमत वाली सरकारको लानेका जनताको अनुरोध करते है. वे यह भी कहेते है कि पूर्ण बहुमत होनेके कारण उनकी सरकारकी उपलब्धियां अभूतपूर्व है. गठबंधनकी सरकारें अस्थिर होती हैं और उनकी उपलब्धियाँ पारस्परिक विरोधाभासोंके कारण देशके विकास पर ऋणात्मक असर पडता है.

कटारीयाजी का साध्यः “गठबंधनवाली सरकार श्रेय है” उससे डरना नहीं.

अब हमारे कटारीया भाईका एजन्डा है कि नरेन्द्र मोदीके इस तर्कका खंडन कैसे किया जाय?

किसी भी सत्यका खंडन करना हो तो सर्व प्रथम तो जो सत्य है उसको छोडकर, दुसरे विषय पर विवरण तयार कर देना चाहिये. तत्‍ पश्चात्‍, जो सत्य है उस सत्यको उलज़ा दो. यानी कि जिस समस्याको सुलज़ानेका बीडा जिस व्यक्तिको दिया था उसको पार्श्व भूमिमें रख दो और उसके स्थान पर पूर्व निश्चित और आप जिस व्यक्तिको या समूहको रखना चाह्ते हो उस/उन को रख दो. फिर श्रेय   उस/उन को दे दो.

सियासतमें ऐसा तो बार बार होता है.

जैसे कि दूरसंचार प्रणालीको सुधारनेका बुनियादी ढांचा (ईन्फ्रास्ट्रक्चर)का काम तो बहुगुणाने किया था. लेकिन बहुगुणा उसका श्रेय स्वयं ले रहे थे तो इन्दिरा गांधीने उनको हटा दिया और पक्षसे भी निकाल दिया. ऐसा ही हाल इन्दिराने वीपी सिंगका किया था जब वे अर्थमंत्री थे.

किन्तु नरसिंह रावने ऐसा नहीं किया. नरसिंह रावने अर्थतंत्रके सुधारका श्रेय मनमोहन सिंहको लेने दिया. वैसे तो उसका श्रेय अर्थ-तंत्र-सलाहकार टीम जिसमें नेता सुब्रह्मनीयम स्वामी थे, उनको भी जाता है. नीतियाँ एक अति असरकारक परिबल है और प्रक्रियायें भी एक और परिबल है. प्रक्रियाको सुधारने की महद्‍ जिम्मेवारी वित्त मंत्रीकी होती है. मनमोहनके वित्तमंत्रीकालके जमानेमें “शरद महेता”वाला कौभान्ड हुआ. क्यों कि मन मोहन सिंहने बेंको कि कागजी लेनदेनकी गलतीयों पर ध्यान नहीं दिया था. फिर उन्होंने आश्वासन दिया कि “अबसे (भविष्यमें) ऐसा नही होगा.” यदि मनमोहन सिंह चालाक होते तो, उनको जो प्रधानमंत्री का प्रमोशन मिला, तब जो सत्यम्‍ स्कॅम हुआ वह न होता.

“नहेरुवीयन प्रणाली”

नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी सियासतमें गलतीयोंको दुसरोंके नाम पर चढा देना और उपलब्धीयोंको नहेरुवंशके फरजंद पर चढा देना आम बात है. जैसे कि चीनके साथके युद्धमें भारतकी हारका कुंभ सिर्फ वि.के. मेनन पर फोड देना, और पाकिस्तान के उपर भारतकी १९७१की विजयका श्रेय तत्कालिन सुरक्षा मंत्री जगजिवन रामको न देना और सिर्फ इन्दिरा गांधीको दे देना, ये सब नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षका संस्कार है.

नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी ऐसी प्रणालीयोंपर तालियाँ पाडने वाले मूर्धन्य भारतमें पहेले भी विद्यमान थे और आज भी विद्यमान है.

अब गठबंधन वाली सरकारोंकी उपलब्धीयां पुरस्कृत करने के लिये हमारे कटारीया भाई, भारतवर्षकी प्रथम संयुक्त “राष्ट्रीय सरकार” १९४७-५२का उल्लेख करते हैं.

याद करो मूल कोंग्रेसी सदस्यका संस्कार

कोंग्रेसके शिर्ष और सर्वोच्च नेता यानी कि “नहेरु”की प्रच्छन्न मानसिकताको छोड दें, और कोंग्रेसके तत्कालिन सामान्य सदस्यकी बात करें तो मुज़े निम्न लिखित प्रसंग याद आता है.

१९४२में महात्मा गांधीने “भारत छोडो” आंदोलन छेडा था और जनताको कहा था कि हर व्यक्ति स्वयंका नेता है. आप कानून भंग करोगे. खूल्लेआम कानून भंग करोगे और यदि आप गिरफ्तार हुए तो आपको सहर्ष गिरफ्तारी स्विकारोगे और कारावासका भी स्विकार करोगे.

एक महिला थी. उसने अपने महिला साथीयोंके साथ प्रदर्शन किया. उस महिलाको पूलीसने गिरफ्तार किया. उस महिलाने कुछ गहने पहने थे. उसने पास खडे एक कोंग्रेसीको अपने गहने दे दिया और कहा कि मेरे घरका पता यह है, आप इन गहेनोंको मेरे घर पर पहूँचा देना, और कह देना कि मैं कारावास जा रही हूँ. उस कोंग्रेसीने कहा कि “बहनजी आप तो मुज़े पहेचानते तक नहीं है. आपने मुज़पर विश्वास कैसे कर दिया कि मैं इन गहनोंको आपके घर तक पहूँचा दूंगा?”

उस महिलाने उत्तर दिया कि आप कोंग्रेसी है इस बात ही मेरे लिये पर्याप्त है कि आप विश्वसनीय और नीतिमान है.”

आज क्या ऐसी स्थिति है कि “विश्वसनीयताके लिये कोंग्रेसी होना पर्याप्त है?”

नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके ६५ सालके शासनके बाद नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके नेतागण, अपनी विश्वसनीयताका, जनतामें कायम रख सके हैं क्या?

नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके आम सदस्यकी बात छोडो, नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके शिर्षनेता भी विश्वसनीय नहीं रहे है. इसका क्या हमारे कटारीयाजीको मिसाल देना पडेगा?

नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके सर्वोच्च नेतागण स्वयं “बेल (जमानत)” पर है. स्वयंके लिये जमानत लेना, यह बात ही मूल कोंग्रेसके मूलभूत सिद्धांतोसे विपरित है. किस मूँह से कोई नीतिमत्ताके इस विनिपातसे पराङगमुख बन सकता है. और वह भी एक मूर्धन्य राजकीय विश्लेषक श्रीमान शेखर गुप्ताजी.

“राष्ट्रीय सरकार” कोई चूनावी गठबंधन था ही नही.

Paint01

राष्ट्रीय सरकार के समय पर बना गठबंधन कोई गठबंधन नहीं था. वह कोई सत्ता पाने के लिये या तो किसी अन्य गठबंधनके विरुद्धवाला गठबंधन नहीं था. महात्मा गांधी चाहते थे कि भारतका तत्कालिन शासन और संविधान सभीको साथ लेके चले.

राष्ट्रीय सरकारको गठबंधनवाली सरकार का नाम देना “तर्कहीन” ही नहीं किन्तु “हास्यास्पद” भी है. यदि कोई विद्वान ऐसी तुलना और विश्लेषण करे तो उसकी निष्पक्षता पर कई प्रश्न चिन्ह उठते हैं. जो गठबंधन ही नहीं था उसको गठबंधन बताके उनकी उपलब्धीयोंको “सियासती गठबंधन भी ऐसी उपलब्धीयोंके लिये सक्षम है” ऐसा बताना, यह बात तो जनताको गुमराह करनेके बराबर है.  

वैसे तो हर गठबंधन यदि वह सियासती गठबंधन है तो वह एक पूर्ण बहुमत वाले पक्षकी सरकारसे श्रेय नही हो सकता, चाहे उसका आधार सियासती हो या न हो.

सियासती “अस्थिरता” नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी देन है. १९६९ और १९७९की अस्थिर सरकारोमें नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षका बडा योगदान था. इनका जिक्र हमारे कटारीया भाईने नहीं किया है.

१९६७ तक नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी आंतरिक संगठन शक्ति कायम थी. नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी शिर्ष नेता इन्दिरा गांधीने इस आंतरिक संगठनका विभाजन किया. १९७१की इन्दिरा-विजय नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी संगठन शक्ति पर आधारित नहीं था. वह विजय इन्दिरा-वेव्ज़ के कारण था. नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षका संगठन तो निर्बल ही बन गया था. १९८४की नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षकी विजय भी “सहानुभूति-वेव्‍ज़के” कारण था. और इसके बाद तो बहुपक्षीय-संगठनवाला अस्थिरताका युग शुरु हुआ इस बातको तो कटारीयाजी स्वयं कबुल करते है.

वी.पी. सिंघवाले बहुपक्षीय-संगठन सरकारकी उपलब्धीयां थी ऐसा कटारीयाजी प्रदर्शित करते है. वास्तवमें मोरारजी देसाईकी सरकारकी उपलब्धीयां कई गुना अधिक थी. इस बातको यदि हम छोड भी दें तो वीपी सिंघ स्वयं नरेन्द्र मोदीकी तरह नीतिमत्तामें मानते थे. तो भी, उनके उपर भी नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्षके नेताओंने कीचड उछाला था. जैसे कि वीपी सिंघका विदेशमें (सेन्टकीट्समें) एकाउन्ट था.

जब भी नीतिमत्ता की बात आती है तब बहु पक्षीय गठबंधन कमज़ोर पड जाता है.

इसका कारण यह है कि वंशवादी पक्षका आधार एक वंशवादी नेता होता है. उस पक्षके सदस्य, सियासतमें सिर्फ और सिर्फ पैसे बनानेके लिये आते है. इन सदस्योंको सर्वोच्च पद प्राप्त करनेकी ख्वाहिश होती ही नहीं है. क्या वाड्राको प्रधान मंत्री बननेकी ख्वाहिश है? क्या पप्पु यादवको मुख्य मंत्री बनना है? क्या अभीषेक मनु सिंघ्वी या रणदीप सुरजेवालाको प्रधान मंत्री बनना है? नहीं भाई हमें सर्वोच्च पद नहीं चाहिये. हमें हो सके तो मंत्री बना दो और यदि मंत्री भी न बना सको तो सिर्फ हमे हमारा असामाजिक यानी कि गैरकानूनी काम करने दो और कायदा हमे स्पर्ष न करे उसका आप ध्यान रक्खो. हमें सिर्फ यही चाहिये.

Image may contain: 1 person, text

अल्पमत सरकार आवकार्य नहीं है

नरसिंह राव की सरकार अल्प मत सरकार थी. और उसने ५ साल शासन किया. एक दो अल्पमत सरकारका उदाहरण लेके हम ऐसा वैश्विक धारणा/निष्कर्ष बनाके भविष्यवाणी नहीं कर सकते कि अल्पमत सरकार हर हालतमें आवकार्य है.  जब पक्षीय संगठनका मूलभूत प्रयोजन सामनेवाले को हराना हो और पैसा बनानेके लिये सत्ता प्राप्त करना हो,  तो आपको आठ सालमें तीन चूनाव के लिये तयार रहेना पडता है.

विवादास्पद उपलब्धीयां

कटारीया भाई ऐसा दिखाते है, कि चाहे कुछ भी हो १९९७में पी. चिदम्बरमने राष्ट्रीय विनिवेश पंचकी रचना की और पब्लिक उपक्रमोंका लीस्टींग और प्राईवेटाईझेशनका दरवाज़ा खोला.

कटारीयाजी प्रदर्शित करते है कि भाई हम तो तटस्थ है. मोदीकी विरुद्धमें है. उसका मतलब यह नहीं कि हम बाजपाईजीके भी विरोधी है. बाजपाईजीमें तो दम था. (मतलब? नरेन्द्र मोदीमें वह दम नहीं), क्योंकि बाजपाईने चतुर्भूज हाई वे योजना बनाई. दो बडे एरपोर्टका प्राईवेटाईझेशन किया. ११ पब्लिक सेक्टरकी कंपनीयां जो प्रोफिट करती थी और २४ आई.टी.डी.सी. हॉटेल्स बेच दी. और सर्वशक्तिमान नरेन्द्र मोदी एक भी कंपनी बेच नहीं पाये. कटारीया साहबका संदेश यह है कि पब्लिक सेक्टरकी कंपनीयां बेचना सरकार शक्तिमान होनेका गुण है. “साध्यम इति सिद्धम्‌.”

अरे भाई साहब, खोटमें चलनेवाली सरकारकी कंपनीयोंको नफा करनेवाली बनाना ही सरकारी शक्तिका गुण है जो नरेन्द्र मोदीने गुजरातमें करके दिखाया है. हर गांवमें हर खेतमें बीजली पहूँचाना और वह भी २४/७ घंटे, यह भी तो उपलब्धी है नरेन्द्र मोदीजीकी. हर घरमें गेस पहूँचाना यह भी तो एक महान उपलब्धी है.

भारतीय रीज़र्व्ड सोनेको देशके बाहर ले जानेकी हिमत दिखाना और वह भी भूगतानके लिये, इस घटनाको कटारीयाजी, अपना दिमाग तोड परिश्रमसे, तत्‌कालिन प्रधान मंत्री चन्द्रशेखरकी   उपलब्धीमें गीनती करवाते हैं. लेकिन ऐसी स्थिति किसने उत्पन्न की थी और इसके लिये कौनसी सरकार जीम्मेवार थी उस विषय पर हमारे कटारीया भाई मौन है.

कटारीयाजी मानते है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ १९८९-९०में कमजोर थी. शायद कटारीयाजी १९८९से लेकर २०१४ तक कश्मिरमें हिन्दुओंकी कत्लेआम और आतंकवादीयोंका और नक्षलीयोंका देशके महानगरोंमें घुस कर और देशके भीतरी इलाकोंमें दूर दूर तक घूस घूस कर अपनी बोम्बब्लास्ट वाली प्रवृत्तियां विस्तारना, इन सब बातोंको राष्ट्रीय सुरक्षासे जोडनेमें नहीं मानते है. नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्ष,  राफेल का डील नहीं कर पाना उसका कारण ही तो २०१२में पैसा न होना ऐसा एन्टोनी खूद संसदमें बताते है. इस परिस्थितिको यदि दिवालियापन नहीं कहोगे तो क्या कहोगे?  

कटारीयाजी क्या समज़ते है?

कटारीयाजी समज़ते है कि, १९८९-९०की अराजकता और शासकीय निस्फलता पर जोर देना नहीं चाहते. क्यों कि यह बात, कटारीयाजीके एजन्डाके विरुद्ध है.  कटारीयाजी “आतंकवाद” शब्द का उपयोग करना ही नही चाहते है. वे यह कहेते है कि १९९१-१९९६ तक कश्मिर  सबसे बुरी स्थितिमें था. लेकिन परिस्थिति काबुमें थी.

Image may contain: 1 person, text

कमालकी बात है. यदि परिस्थिति काबुमें थी तो ५०००००+ हिन्दुओंको पुनर्थापित क्यों नहीं किया?

यदि परिस्थिति काबुमें थी तो कितनोकों गिरफ्तार कीया? परिस्थिति काबुमें थी तो  कितने केस कोर्टमें दर्ज किये? परिस्थिति काबुमें थी तो किन किन मंत्रीयोंको जिम्मेवार बनाया और उनके उपर कितने केस दाखिल किया? परिथिति काबु में थी तो कोई एस.आई.टी.का गठन किया या नहीं?

कटारीयाजी इन सब कमजोरीयोंको और निस्फलताओंको, नजर अंदाज करवाने लिए, इन सब विषयोंको कश्मिर और केन्द्रस्थ शासकोंकी क्रीमीनल निस्फलतासे नहीं जोडते है.

यह बात समज़नी चाहिये कि खालिस्तानवादीयोंका आतंकवाद खतम करनेका श्रेय सिर्फ केपीएसगील को जाता है (शायद अजित डोभाल भी सामिल हो), और खालिस्तानी नेताओंको बडाभाई बनानेका श्रेय इन्दिरा गांधीको जाता है. लेकिन कटारीया भाई, नहेरुवंशवादको शायद जनतंत्रके लिये घातक नहीं मानते. वे इस बातको समज़नेके लिये तयार नहीं कि, यदि जे.एल. नहेरु अपने कार्यकालमें, अपने फरजंद, इन्दिरा गांधीको, अपना अनुगामी प्रधानमंत्री बनानेका प्रबंध करके नहीं जाते, तो आज कोंग्रेस पर “नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्ष” होने की गाली नहीं लगती, नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्ष भ्रष्टाचारसे तरबर न होती, और वह कमजोर भी न पड जाती.

कटारीयाजी कुछ विवादास्पद विषयो पर, अपने हिसाबसे तत्कालिन सरकारोंके निर्णयोंको अच्छा निर्णय, बुरा निर्णय, या कमजोरीवाला निर्णय ऐसा तारतम्य निकालते है. और उपसंहार में कहेते हैं कि सुरक्षित बहुमतवाली सरकार नेताओंको बेदरकार और दंभी बनाती है.

इस तारतम्यमें कटारीयाजी, जे.एल. नहेरुका, समावेश करते नहीं है लेकिन इन्दिरा से लेकर, राजिव गांधी होकर,  नरेन्द्र मोदीका समावेश अवश्य करते है.

Image may contain: 1 person, text

नरेन्द्र मोदी समय बद्धता में मानते है

वास्तवमें देखें तो, नरेन्द्र मोदीके वचन, नहेरु के वचन जैसे “अनिश्चित कालिन नहीं है”. याद करो कि जय प्रकाश नारायण, नहेरुकी असमयबद्ध ध्येयोंके कारण ही उनके मंत्री मंडलसे दूर रहे थे. जय प्रकाश नारायणने नहेरुको कहा था कि “आप हरेक ध्येय प्राप्तिके लिये समय बद्ध योजना बनाओ तो मैं आपके मंत्री मंडलमें आउंगा.” लेकिन जे एल नहेरु तो बेदरकार और दंभी थे. उन्होने जयप्रकाशकी बात मानी नहीं. नहेरु समय बद्धतामें नहीं मानते थे. “ तत्वज्ञानीय लुज़ टॉकींग” नहेरुको प्रिय था.

“समय बद्ध ध्येय” नरेन्द्र मोदीका गुण

यदि आज जय प्रकाश नारायण होते तो वे नरेन्द्र मोदीको सहकार करते. नरेन्द्र मोदीजी हमेशा समय बद्धतासे ही चलते है और उन्होने पक्षके ध्येयोंको समयबद्ध प्रोग्राममें रक्खा है. लेकिन कटारीया भाई इनका जिक्र नहीं करेंगे. उनको पसंद है “नहेरुकी देशमें बहेनेवाली घी दूधकी नदिया” और इन्दिराके “गरीबी हटाओके नारे”

उनको ०२-१०-२०१९ तक स्वच्छभारत, २०२२ तक किसानकी आय दुगुनी, २०१९ तक घर घर संडास, २०२२ तक हरेकके पास अपना घर, २०२२ तक बुलेट ट्रेन …. आदि समय बद्ध ध्येय पसंद नहीं इसलिये उनका जिक्र नहीं.   

एक दुसरे विद्वान है जो अरुण शौरी है. वे भी नरेन्द्र मोदीके कटु टीकाकार है.

कुछ लोग जीएसटी और विमुद्रीकरण की कटु टिका करते है लेकिन एक भी माईकापूत नहीं निकला कि उसने बताया हो कि जो काला धन देशमें घुम रहा है उसको सरकारी रेकोर्ड पर कैसे लाया जाय, बेनामी कंपनीयोंको रेकोर्ड पर लाके कैसे कार्यवाही की जाय, फर्जी करन्सीको कैसे निरस्त्र किया जाय, आयकर रीटर्न भरने वालोंकी सख्यां कैसे बढाई जाय, टेक्स कलेक्शनमें कैसे वृद्धि की जाय….?

Image may contain: 14 people, people smiling, text

नरेन्द्र मोदीने तो यह सब करके दिखाया है जो नहेरुवीयन-[इन्दिरा (वंश)] कोंग्रेस पक्ष ६५ सालमें नहीं कर सका.

शिरीष मोहनलाल दवे

Read Full Post »

किसी भी नगरको/ग्रामको/विस्तारको बदसूरत और गंदा कैसे किया जाय … 

गत ब्लोगमें हमने गोदरेज गार्डन सीटीकी व्यवस्थाका संक्षेपमें विवरण किया था. और यह प्रश्न चिन्ह लगाया था कि क्या गोदरेज गार्डन सीटी गंदा और अराजकता वाला विस्तार बनने के काबिल है?

हम कुछ गीने चूने परिबलोंका विवरण करेंगे.

किसी भी विस्तारको बदसूरत करनेमें और अराजकतायुक्त करनेमें प्रजाकी मानसिकता भी प्रभावशाली होती है. यदि नियम (बाय लॉज़ – कानून) बनानेमें उसकी उपेक्षा की तो “विस्तार”में अराजकता फैल सकती है. अराजकताकी शक्यताकी हम बादमें चर्चा करेंगे.

विस्तारको बदसूरत करने वाले परिबल, आकृति (डीज़ाईन)बनावटकी गुणवत्ताका चयन (स्पेसीफीकेशन)  और  कामकी कुशलता का मिश्रण है. यदि आकृति ठीक नहीं है तो क्षतिग्रस्त होनेकी क्षमता अधिक होती है. यदि आकृति सहीं हैकिंतु गुणवत्ता कनिष्ठ प्रकारकी है तो भी उसकी क्षतिग्रस्त होने की शक्यता अधिक है. यदि ये दोनों सही है लेकिन कामकी कुशलता (पुअर वर्कमेनशीप) यथा योग्य नहीं है तो भी वह निर्माण क्षतिग्रस्त हो सकता है.

निर्माण परिपूर्ण होनेके बाद ऐसे प्रकारके निर्माणके, रखरखाव में अधिक खर्च आता है. दुरस्त करने की गतिक्षतिग्रस्त होनेकी गति से कम है तो भी निर्माण गंदा बदसूरत हो सकता है.

एक बात ध्यानमें रखना चहिये कि हम जो उदाहरण लेते हैं वह आज तो छूटपूटकी घटनाए हैं. लेकिन यदि रखरखाव शिघ्राति  शिघ्र नहीं किया गया तो क्षतिग्रस्त विस्तारकी घटनाओं वाले स्थल, बढते जायेंगे और अंतमें विस्तार बदसूरत दिखेगा.

यातायात मार्गकी चौडाईः  आंतरिक मार्गकी चौडाई, आज तो जो दो लेन (१+१=२) वाली है वह सही लगती हैलेकिन भविष्यमे पांच सालके बाद) याता यातकी समस्या हो सकती है. मुख्य मार्ग जो चार लेनका (२+२=४) है उसके विषयमें भी ऐसा कहा जा सकता है.

08 good main road

आंतरिक मार्गोंकी और मुख्य्त मार्गोंकी  आकृतिसूचित गुणवत्ता और निर्माणकी गुणवत्ता सही है.

09 good internal street road

सायकल मार्ग (द्विचक्र वाहन यातायात) भी सही ही है.

किंतु पदयात्रीयोंके लिये जो मार्ग है उसकी आकृति और निर्माणकी गुणवत्ता सही नहीं है.

पेड पौधेंकी जो भूमि है वह नीची है और फुटपाथके दाहिने बाजु का स्तर उंचा हैऔर निर्माणकी वर्कमेनशीप पुअर होने से फुटपाथके किनारे के पत्थर निकल जाते है. यदि इनको शिघ्राति शिघ्र रीपेर किया जाय और किनारे वाले पेडपौधोंकी भूमि उंची कि जाय तो फुटपाथको क्षतिग्रस्त बनने की घटनाओंको रोका जा सकता है.

01 can break at any time

क़ोंट्राक्टरोंका अपना काम होनेके बाद सबस्टांडर्ड रीसरफेसींग वर्क.

05 gas agency does not reinstate properly

जैसे कि गेस एजंसी जब अपना लाईन बीठाती है तो जो खोदाई होती है उनको ढंगसे री-सरफेसींगका काम नहीं करती है. ईनमें गोदरेज प्रोपर्टीज़ की तरफसे शायद नीगरानी नहीं रक्खी गई है. तो इनकी क्षतिग्रस्त स्थलोंकी छूटपूट घटनाएं मिलती है.

मानवीय असभ्यताः
06 why to walk on footpath

रहेनेवालोंको भी नियमका पालन करना चाहिये. लेकिन यदि गोदरेज प्रोपर्टीज़वाले उनको दंडित नहीं करेंगे तो उनकी आदतमें सुधार लाना असंभव है.

 

यदि फुटपाथ है तो निवासीयोंको फुटपाथ पर चलने की आदत डलनी चाहिय

स्वच्छता पर आघात

पशुओंके प्रति दया भावना का प्रदर्शन करना भारतीयोंकी आदत है. इस आदतके गुणदोषमें  पडें परंतु यह दयाभावना के कारण गंदकी फैलानी नहीं चाहिये.

07 we want to feed animals at the cost of cleanliness

स्वच्छताके उपकरण और स्वच्छता कर्मचारीयोंकी नासमज़ः

सफाई कामदारोंकी समज़ है कि उनको केवल पेडपौधोंके पत्तेकागज़के टूकडे,प्लास्टिक बेग्ज़ और उसके टूकडे … आदि ही को कचरा समज़ना है. कुत्तोंकी वीष्टागाय भेंसका गोबर आदि को उठाना सफाईके अंतर्गत नहीं आता है. इसके कारण जब वे सुखकर मीट्टी बनजाता है तब वह हवामें उड जाता है.  वैसे तो गायभैंस कम दिखाई देते है इसलिये ऐसी घटनाएं  छूट पूट मिलतीं हैकिंतु भविष्यमें इनमें वृद्धि हो सकती है.

गोदरेज प्रोपर्टीज़का काम व्यापारी और निवासी आवास पैदा करना है  कि अवैध व्यवसाय दिलाना

गोदरेज गार्डन सीटी में कोमर्सीयल केंद्र है. सीटी सेंटरमें कई सारी सुयोग्य तरिकेसे निर्मित दुकाने हैं. इसका निर्माण परिपूर्ण नहीं हुआ होगा.

लेकिन हमारे कुछ व्यवसायी लोगोंको मुफ्त मे व्यवसाय करने की जगह चाहिये. इसकी दो वजह है. एकः यह कि पुलीस या तो सुरक्षा कर्मीको खुश रखना और मुफ्तमें जगहका व्यवसायके लिये उपयोग करना.

हाथ लारी” एक ऐसा ही व्यवसाय है. जिसमें व्यक्ति एक हाथ-लॉरीमें सब्जी-तरकारी फैलाके ग्राहकोंकी प्रतिक्षा करता है. और ग्राहक भी उसकी लॉरीमेंसे सब्ज़ी तरकारी खरीदता है.

प्रारंभमें एक हाथलॉरीवाला, एक हाथलॉरीमे सब्ज़ी लगाके एक मार्गकी फुटपाथ पर पार्ट टाईम खडा रहेता है.

फिर वह अपना खडा रहनेकी समय मर्यादा बढाता रहेता है.

05 hand lorry with spreaded material

फिर वह एक लॉरीमें तीन लॉरीका सामान लाता है. वह सामान फुटपाथ पर फैला देता है. फिर वह और किसमका भी सामान लाता हैजैसे कि नारीयलवॉटरमेलनकेले … आदि.

ऐसा करनेके समयके अंतर्गत उसकी सुरक्षा दलो सें पुख्ता दोस्ती हो जाती है. शायद उपरी स्तरके कर्मचारी/अधिकारीगणके साथ भी परोक्ष प्रत्यक्ष संबंध प्रस्थापित हो जाते है.

तो एक दुसरा हाथ लॉरीवाला भी पैदा हो जाता है. उसका  भी ऐसे ही इतिहासका पुनरावर्तन होता है. 

05b one more larywala

फिर तो क्या कहेनाबलुन वाला आता हैखिलौना वाला आता हैगन्नेका रसवाला  जाता है. फुलवाला आता हैमोची आता हैपंक्चर रीपेरर आता है… ऐसे फुटपाथ पर अतिक्रमण बढता ही रहता है.

इसकालके अंतर्गत कई कर्मचारीगण/अधिकारीगणका तबादला होता रहेता है इस लिये किसीकी जीम्मेवारी फिक्स करना उच्चस्तरीय अधिकारीगण योग्य समज़ते नहीं है.

इस प्रकार समयांतर कालके अंतर्गत अराजकता फैल जाती है. गोदरेज गार्डन सीटीमें अराजकता के बीज बोये है. आज जो छूटपूट घटना है और जिसको निवारा जा सकता हैयदि गोदरेज गार्डन सीटीके अधिकारीयोंकी मानसिकता यही रही तो पांच सालमें अराजकता फैल सकती है.

अग्निशामक तकनिकी सुविधाएं और उसके नियमके अंतर्गत प्रावधान

अग्निप्रतिरोधक उपकरण, अग्निशामक व्यवस्थाएं और आपातकालिन व्यवस्था रखना आदिके बडे कठिन नियम है. उसमें एक नियम है बहु मंज़िला इमारतमें आपातकालमें निवासीयोंको निश्चित जगहसे उठानेका. इस जगहको फायर रेफ्युज खंड (फायर रेस्क्यु रुम) कहेते है. निश्चित मंज़िल पर दो ऐसे खंड आमने सामनेकी दिशामें छोर पर रक्खे जाते है. दो इस लिये कि यदि एक छोरका खंड आगके कारण उस आगकी दिशामें उपलब्ध नहीं होता है तो तो दुसरा छोरवाला खंड काममें  जाता है. निवासीयोंको वहां इकठ्ठा करके क्रॅनकी मददसे बचाया जा सकता है. फायर रेस्क्यु खंड एक स्वतंत्र खंड होता है. उसमें  तो कोई निवासी अपना सामान रख सकता है  तो उसका नीजी उपयोग कर सकता है. इस खंडको बंद करना निषेध है. इस खंडमें प्रवेश होता है पर द्वार नहीं रखा जा सकता. उसी प्रकार उसमें गेलेरी होती है उसमें उसको बंद करनेकी खीडाकीयां नहीं होती. ता कि आपात कालमें आसानीसे निवासीयोंको निकाले जा सके.

लेकिन यहां गोदरेज गार्डन सीटीके बहुमंज़िला इमारतोमें इसका अक्षरसः पालन नहीं किया गया. दोमेंसे एक फायर रेस्क्यु खंडको करीबी निवासीको ऐसे ही व्यक्तिगत उपयोगकी सुविधा दे दी गई है.

01 fire rescue room02 break open wall of Fire rescue room

04 fire rescue room exclisive use

नियम के अनुसार फायर रेस्क्यु खंड को कोई निवासी अपने अंगत स्वार्थ के लिये उपयोगमें ले नहीं सकता. किंतु गोदरेज गार्डन सीटीके अधिकारीयोंने फायर रेस्क्यु खंडमें विशेष वीज सुविधा भी उपलब्ध करवायी है. फायर रेस्क्यु खंडमें वीज सुविधा होती है. और उसमें एक लेंप होल्डरका प्रावधान होता है. सामान्य परिस्थितियोंमे इस लेंप होल्डरमें लेंप    लगाना होता है ताकि असामान्य परिस्थितिमें लेंपका अन्वेशण करना न पडे. रेस्क्यु खंड दो होते है. एक मुख्य और एक विकल्पके लिये अतिरिक्त (स्टेंड बाय). कौन मुख्य और कौन विकल्प केलिये अतिरिक्त यह कोई नामाभिधानका विषय नहीं है. दोनों ही एकदुसरेके परिपेक्ष्यमें विकल्पीय है. जैसे की दो स्टेर केस होते है  तो एक यदि आग की घटनामें उपलब्ध नहीं है तो दुसरा जो सामने के छोर पर है वह उपलब्ध होता ही है. तो यहां गोदरेज गार्डन सीटीमें क्या हुआ कि निवासीको फेसीलीटेट करने के लिये उसके पासवाले रेस्क्यु खंडमे तो दिवारको तोडके प्रवेश द्वार तो लगवाही दिया पर उसके लिये फायर रेस्क्यु खंडमें लेंप भी लगवा दिया और ट्युबलाईटभी लगवा दिया. अब फायर रेस्क्यु खंडकी बीजलीका कंट्रोल किसके पास है और उसका विद्युत का बील किसको आता है यह संशोधन का विषय है.

भारतमें और खास करके उत्तरभारतीयोंकी (खास करके राजस्थान, पंजाब, यु.पी, बिहार और गुजराती भी कम नहीं) आदत है कि गैरकानूनी तरीके से उपलब्ध जगहोंका उपयोग करना. और अधिकारीगण/कर्मचारीगण भी वैसे ही चरित्रवाले होनेसे अवैध तरीकेसे आंखे बंद कर देते है.

इसका समाधान क्या है?

कौटिल्यने कहा है कि, आमजनता तो “दंड” से ही सावधान रहेती है. 

“गोदरेज गार्डन सीटी”में और क्या करने कि आवश्यकता है?

गोदरेज गार्डन सीटी बडी आसानीसे स्मार्ट सीटी विस्तार बन सकता है. अभी तो यह विकसित हो ही रहा है तो इसमें अभीसे जनताको सुव्यवस्थित और सुसंस्कृत की जा सकती है.

(१) प्रत्येक मार्ग पर जैसे कि मुख्य मार्ग पर गति-सीमा ४० कि. आंतरिक मार्ग पर १५ कि. और क्लस्टरके अंदर ५/१० कि. की सीमा रक्खी जा सकती है. गतिसीमा के सूचना बॉर्ड रखना चाहिये.

(२) प्रत्येक प्रवेशद्वार के पास सीसीटीवी केमेराका प्रबंध किया जाना चहिये.

(३) प्रत्येक क्लस्टरमें सदस्यके लिये स्मार्टकार्डसे प्रवेश किया जा सकता है,

(४) प्रत्येक बिल्डींगमे प्रत्येक स्तर (फ्लोर) पर भी सीसीटीवी केमेरा का प्रबंध होना चाहिये. सुरक्षा कर्मचारी निवासीसे बात करके सुनिश्चित करेगा कि आगंतुक को प्रवेश देना है या नहीं, यदि निवासीने अनुमति दी, तो वह आगंतुक वहीं पर ही गया या कहीं और गया.

(५) प्रत्येक मार्ग पर भी सीसीटीवी केमेरा का प्रावधान किया जाना चाहिये ताकि सभी कोई सज्जनता पूर्वकका व्यवहार करें और यातायातके नियमोंका भंग करनेसे बचे.

(६) सीसीटीवी केमेरासे अतिक्रमण पर कडा निरीक्षण रखा जा सकता है.

कर्मचारीको नियमपालनके लिये प्रतिबद्ध होना चाहिये. यदि ऐसा नहीं हुआ तो समज़ लो 

अराजकताका आरंभ है.

 

शिरीष मोहनलाल दवे

Read Full Post »

%d bloggers like this: